हाईकोर्ट का सख्त आदेश- जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव निष्पक्ष ON VIDEO कराए आयोग

Smart News Team, Last updated: Fri, 2nd Jul 2021, 4:51 PM IST
  • यूपी के 75 में से 22 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव निर्विरोध होने और कई जगह चुनावी धांधली के सपा कैंडिडेट्स के आरोप के बीच हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को सख्ती के साथ निष्पक्ष चुनाव कराने का आदेश दिया है. उत्तर प्रदेश के बचे हुए 53 जिलों में 3 जुलाई, शनिवार को Zila Panchayat Adyaksh का चुनाव है.
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को निष्पक्ष कराने का आदेश दिया.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के 53 जिलों में 3 जुलाई शनिवार को होने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने चुनाव आयोग को निष्पक्ष तरीके से मतदान और मतगणना संपन्न कराने का आदेश दिया है. राज्य के 22 जिलों में आयोग ने निर्विरोध चुनाव की घोषणा की थी जिनमें 21 जिला पर बीजेपी समर्थित और 1 में सपा समर्थिक कैंडिडेट Zila Panchayat Adyaksh बनने में कामयाब रहे हैं.

हाईकोर्ट ने निष्पक्ष चुनाव कराने का आदेश सीतापुर से समाजवादी पार्टी की जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रत्याशी अनीता की याचिका पर दिया है. अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी. कोर्ट ने अगली सुनवाई से पहले रिपोर्ट भी तलब किया है. न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने यह आदेश सीतापुर से प्रत्याशी अनीता की याचिका पर पारित किया.

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याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसके कालिया और अधिवक्ता अमित सिंह भदौरिया ने कोर्ट में दलील दी कि सत्ताधारी दल की प्रत्याशी श्रद्धा सागर के पक्ष में चुनाव को प्रभावित किया जा रहा है. प्रत्याशियों के ऊपर मुकदमे और दूसरे तरह का दबाव बनाया जा रहा है. ऐसी स्थिति में चुनाव निष्पक्ष होता नजर नहीं आ रहा है. याची की ओर से मांग की गई कि पूरी चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाए.

वहीं, ऐसी ही एक याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी चुनाव आयोग को जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में वोटिंग से लेकर काउंटिंग तक की वीडियोग्राफी कराने का आदेश दिया है. सपा प्रत्याशी मालती यादव की याचिका पर न्यायमूर्ति मनोज मिश्र और न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किया है. मालती के वकील नरेन्द्र पांडेय ने संदेह जताया कि मतदान में गड़बड़ी हो सकती है इसलिए वीडियो में सब कुछ कैद होना चाहिए. राज्य निर्वाचन आयोग के वकील तरुण अग्रवाल ने कहा कि पहले ही ऐसा आदेश जारी हो चुका है इसलिए याचिका व्यर्थ है.

22 जिले जहां निर्विरोध चुने गए जिला पंचायत अध्यक्ष

यूपी के जिन 22 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में एक प्रत्याशी के नामांकन करने या दूसरे का पर्चा खारिज होने जाने के कारण निर्विरोध जीत हो चुकी है उनमें सहारनपुर, बहराइच, इटावा, चित्रकूट, आगरा, गौतम बुद्ध नगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अमरोहा, मुरादाबाद, ललितपुर, झांसी, बांदा, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, गोरखपुर, मऊ, वाराणसी, पीलीभीत और शाहजहांपुर शामिल है. इनमें इटावा को छोड़कर बाकी सारे जिलों पर सत्ताधारी भाजपा ने कब्जा जमाया है जबकि इटावा में सपा का कैंडिडेट जीता है. 

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कई जिलों में सपा कैंडिडेट के नामांकन तक नहीं कर पाने या उनका पर्चा खारिज होने के बाद 11 जिलाध्यक्षों को हटा दिया था. पार्टी ने ये माना कि इन लोगों की लापरवाही या मिलीभगत से बीजेपी को खुला मैदान मिला और पार्टी वहां भी चुनाव तक नहीं लड़ सकी जहां उसके समर्थक जिला पंचायत सदस्यों की संख्या बीजेपी वालों से ज्यादा थी. 

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