यूपी में अपराधियों को टिकट देकर बोली सपा, भाजपा, कांग्रेस- दागी हैं तो क्या हुआ, लोकप्रिय हैं

Swati Gautam, Last updated: Wed, 19th Jan 2022, 3:56 PM IST
  • उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के चलते चुनाव आयोग के निर्देश के तहत भाजपा, सपा और कांग्रेस ने आपराधिक इतिहास वाले कैंडिडेट्स का ब्यौरा जारी किया है. अब तक भाजपा ने 29, सपा ने 21, रालोद ने छह और कांग्रेस ने 10 प्रत्याशियों का आपराधिक इतिहास सार्वजनिक किया है. साथ ही तर्क देते हुए राजनीतिक पार्टियों का कहना है कि 'दागी हैं तो क्या हुआ लोकप्रिय हैं'.
File photo

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के चलते सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने सभी दलों के लिए प्रत्याशी घोषित करने के 48 घंटे के भीतर उनका पूरा आपराधिक इतिहास (अगर है तो) सार्वजनिक करना जरूरी कर दिया है. जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दल भी अपने उम्मीदवारों का आपराधिक ब्यौरा जनता के सामने पेश कर रहे हैं. यूपी चुनाव के मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों की कुंडली अब जनता के सामने आने लगी है. इसी कड़ी में कोई राजनीतिक दल ने उन्हें टिकट क्यों दिया इसका तर्क देते हुए 'दागी हैं तो क्या हुआ लोकप्रिय हैं' बता रहे हैं तो कोई कह रहे हैं कि उम्मीदवार दागी हैं नहीं, दाग लगाए गए हैं. बता दें कि अब तक भाजपा ने 29, सपा ने 21, रालोद ने छह और कांग्रेस ने 10 प्रत्याशियों का आपराधिक इतिहास सार्वजनिक किया है.

बता दें कि भाजपा 29 प्रत्याशियों का ब्योरा जारी किया है, उनमें डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का नाम भी शामिल है जिन पर आधुनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और धरना प्रदर्शन से जुड़े मुकदमे दर्ज हैं. भाजपा का तर्क है कि केशव भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण यह केस लगा दिए गए हैं. वह लोकप्रिय और समाजसेवी हैं इसलिए उन्हें टिकट दिया गया है. वहीं सरधना से सपा प्रत्याशी पर अतुल प्रधान गैंगस्टर कोर्ट समेत 37 अपराधिक मुकदमे दर्ज हैं जिसका तर्क सपा ने बताया है कि अतुल की राजनीति में लोकप्रियता है. तो किसी सपा ने कहा है कि इन्हें टिकट इसलिए दिया गया, क्योंकि ये समाजसेवी हैं, गरीबों की मदद करते हैं और दूसरों के मुकाबले ज्यादा बेहतर हैं.

UP चुनाव: योगी के लिए चुनाव प्रचार करेंगे शिवराज, उमा, प्रह्लाद पटेल जैसे कई बड़े नेता

क्या है मामला

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने सभी दलों के लिए प्रत्याशी घोषित करने के 48 घंटे के भीतर उनका पूरा आपराधिक इतिहास (अगर है तो) सार्वजनिक करना जरूरी कर दिया है. दलों को यह भी बताना होगा कि आपराधिक छवि का उम्मीदवार क्यों चुना? साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो राजनीतिक दल कोर्ट के आदेश के बाद भी उम्मीदवारों का आपराधिक ब्यौरा सार्वजनिक नहीं करते हैं उन पर कोर्ट उस याचिका को लिस्ट करने पर विचार करेगा जिसमें कहा गया है कि जो आदेश का पालन नहीं करता है उन दलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी. इसके तहत तमाम राजनीतिक दल कोर्ट के आदेश के तहत अपने उम्मीदवारों का आपराधिक इतिहास बताकर चुनावी मैदान में उतारने के संबंध में विवरण दे रहे हैं.

अखिलेश के चुनाव लड़ने के फैसले पर बीजेपी मंत्री का तंज - मन से नहीं भरे मन से चुनाव लड़ने जा रहे

दलों के इन उम्मीदवारों पर सबसे ज्यादा केस

समाजवादी पार्टी

अतुल प्रधान पर 37 मुकदमे

योगेश वर्मा पर 31 मुकदमों में

असलम अली पर 9 मुकदमे

अमरपाल शर्मा पर 7 मुकदमें

हरीश कुमार पर 5 मुकदमे

भाजपा

चौधरी बाबूलाल पर 7 मुकदमा

अमित अग्रवाल पर 6 मुकदमे

संगीत सोम पर 6 मुकदमे

कपिल अग्रवाल पर 6 मुकदमे

कमलदत्त शर्मा पर 6 मुकदमे

कांग्रेस

रामनाथ सिकरवार पर 10 मुकदमे

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें