यूपी चुनाव : बीजेपी-जदयू की राहें अलग, कल जारी होगी JDU के उम्मीदवारों की पहली लिस्ट

Mithilesh Kumar Patel, Last updated: Fri, 21st Jan 2022, 8:41 PM IST
  • उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावी मैदान में जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू ने अकेले उतरने का फैसला किया है. शनिवार को दोपहर में पार्टी की तरफ से उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की जाएगी. इसकी जानकारी जेडीयू के वरिष्ठ नेता व मौजूदा समय में यूपी के पार्टी प्रभारी केसी त्यागी ने दी है.
जनता दल यूनाइटेड पार्टी के यूपी प्रभारी केसी त्यागी

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावी मैदान में जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू ने अकेले उतरने का फैसला किया है. जेदयू की तरफ से उम्मीदवारों की पहली सूची शनिवार को दोपहर में जारी की जाएगी. इसकी जानकारी जेडीयू के वरिष्ठ नेता व मौजूदा समय में यूपी के पार्टी प्रभारी केसी त्यागी ने दी है. इस दौरान त्यागी ने बताया कि बीजेपी के साथ सीटों पर सहमति नहीं बन पाई है. यही कारण है कि जदयू अब यूपी चुनाव 2022 में अकेले उतरेगी.

बिहार में बीजेपी जदयू की सहयोगी पार्टी है. इसलिए अटकलें लगाई जा रही थी यूपी चुनाव में भी दोनों एक साथ लड़ेंगे. फिलहाल यूपी में बीजेपी और जेदयू की राहें अलग-अलग हो गई हैं. इसे लेकर पहले ही जेदयू के यूपी प्रभारी केसी त्यागी ने बता दिया था कि भाजपा के साथ सीटों का सम्मानजनक समझौता नहीं होने के कारण जदयू ने भाजपा से अलग चुनाव लड़ने का फैसला लिया है. जानकारी के मुताबिक, यूपी के चुनावी मैदान में उतरने के लिए जदयू ने भाजपा से करीब 20 सीटों की मांग की थी. जदयू को इतनी सीटें देने के लिए भाजपा तैयार नहीं हुई. जिसकी वजह से दोनों की राहें अलग हो गई हैं.

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यूपी में भाजपा और जेडीयू के बीच गठबंधन को लेकर शाहनवाज़ हुसैन ने कहा कि वे खुद केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य भी हैं और इस बारे में उनकी कोई बातचीत नहीं हुई है. इस बारे में बिना पूछे प्रतिक्रिया नहीं दे सकता. लेकिन एनडीए के उम्मीदवार क़रीब -क़रीब तय हो गए हैं. वहीं बिहार सरकार में मंत्री मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी ने पहले ही यूपी चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है.उत्तर प्रदेश में  विकास शील इंसान पार्टी (वीआईपी) द्वारा चुनाव लड़ने पर वरिष्ठ भाजपा नेता व बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज़ हुसैन ने कहा कि यूपी में बहुत सी पार्टियां लड़ रही हैं, इसकी चिंता बीजेपी कहाँ करती है. सैंकड़ों पार्टी सैंकड़ों जगह चुनाव लड़ती हैं, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.

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