यूपी चुनाव : मात्र 11 फीसदी आबादी, फिर भी ब्राह्मणों का साथ पाने को हर पार्टी बेताब, जानें क्यों

Uttam Kumar, Last updated: Wed, 19th Jan 2022, 9:17 AM IST
  • यूपी में ब्राह्मणों के वोट को निर्णायक माना जाता है. चुनावी दलों के अनुसार प्रदेश में इनकी आबादी करीब 11 फीसदी है. पिछले कई चुनावों से देखा गया है कि जिस पार्टी को इनका समर्थन हासिल हुआ है. सता उन्हें मिली है.
यूपी चुनाव में अभी तक का ब्रह्मणों का गणित.

लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव में महीने भर का समय बचा है. सभी पार्टी अपनी चुनावी बिसात बिछाने में लगी है. सभी पार्टी दलित, पिछड़ों और उच्च जातियों को साधने में पुरी तरह से जुटी है. लेकिन यूपी में ऐसा माना जाता है कि सत्ता पाने के लिए ब्राह्मणों का साथ मिलना जरूरी है. चुनावी रणनीतिकारों के अनुसार जिस पार्टी को ब्राह्मणों का साथ मिलता है, उसके लिए सत्ता की राह आसान हो जाती है. 

राज्य में किसी जाती की संख्या का कोई सटीक आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है. लेकिन सियासी दलों का दावा है कि प्रदेश में करीब 11 फीसदी ब्राह्मण मतदाता हैं. दलित, पिछड़ों की तुलना में ये आंकड़ा कोई ज्यादा नहीं है. लेकिन माना जाता है कि इनकी एकजुटता राजनीतिक रूप से सत्ता बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं. ये भी कहआ जात है कि ब्राह्मण समुदाय के नेता अपनी शर्तों पर पार्टियों में रहते हैं. उपेक्षा होने की स्थिति में वे शिफ्ट होते रहते हैं. 

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लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर संजय गुप्ता के अनुसार ब्राह्मण समुदाय अपनी शर्तों पर चलता है. अगर उसे लगता है कि उपेक्षा हो रही है तो वह दूसरी पार्टियों में शिफ्ट हो जाता है. उन्होंने पिछली चुनाव का गणित बताते हुए कहते हैं कि ब्राह्मण व दलित हमेशा अलग रहते  हैं, लेकिन 2007 के चुनाव में बसपा द्वारा मिले आश्वासन के बाद ब्राह्मण समुदाय ने मायावती के साथ दिया. वहीं 2012 में सपा के साथ हो गया.  फिर 2017 में उनका समर्थन भाजपा के साथ चला गया. 

ब्राह्मणों को अपने ससाथ करने के लिए सभी पार्टियां जोड़ तोड़ से लगी हुई है. सपा-बसपा इसे साधने के लिए विकास दुबे के मामले में खुशी दुबे और पूर्वांचल में ब्राह्मणों के उत्पीड़न का मामला उठा रहे हैं. इसके साथ ही हर मामलों में ब्राह्मणों की अनदेखी का आरोप सरकार पर लगा रहे हैं. वहीं सत्ताधारी पार्टी भाजपा का कहना है कि भाजपा ने किसी के साथ भेदभाव नहीं किया. 

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बीजेपी की तरफ से ब्राह्मणों को साधने के लिए राज्यसभा सदस्य शिवप्रताप शुक्ला के नेतृत्व में एक अलग से कमेटी तक बनाई गई है. यह कमेटी पिछले दिनों दिल्ली में पार्टी के रष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर उन्हें कुछ जरूरी सुझाव भी दिए. वहीं अखिलेश और मायावती परशुराम के सहारे ब्राह्मणों को साधने में जुटी है.  सपा ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के किनारे पशुराम की प्रतिमा लगवाया है. बसपा प्रमुख मायावती ने सत्ता में आने पर भगवान परशुराम की मूर्ति लगवाने के साथ अस्पताल, पार्क और बड़े निर्माण उनके नाम पर करवाने का वादा किया है. 

 

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