यूपी चुनावः दूसरे राज्यों के ये दल अजमाएंगे अपनी किस्मत, कई भाजपा के हैं सहयोगी

Shubham Bajpai, Last updated: Sat, 4th Sep 2021, 1:54 PM IST
  • यूपी विधानसभा चुनाव में इस बार अन्य राज्यों में सत्ता और विपक्ष के राजनैतिक दल अपनी किस्मत अजमाने आ रहे हैं. इनमें से कई दल अपने राज्यों में भाजपा के सहयोगी दल है. वहीं, सी वोटर सर्वे की बात की जाए तो मुख्य दलों को छोड़ अन्य सभी दल कुल 6 से 10 सीटों में सिमट जाएंगे.
दूसरे राज्यों के ये दल अजमाएंगे अपनी किस्मत, कई भाजपा के हैं सहयोगी

लखनऊ.2022 में देश के पांच राज्यों में चुनाव का बिगुल बजने वाला है. इस चुनावों में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण चुनाव यूपी का है. इस चुनाव में सभी की निगाहें लगी हुई हैं. इस बार यूपी चुनाव में राष्ट्रीय पार्टियों, क्षेत्रीय पार्टियों के साथ दूसरे राज्य की अन्य पार्टियां भी अपनी किस्मत अजमाने की तैयारी में हैं. इनमें दिल्ली की सत्ता में काबिज आम आदमी पार्टी, महाराष्ट्र की शिवसेना, बिहार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और तेलगांना की एआईएमआईएम (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) शामिल हैं. यह सभी दल यूपी में गठबंधन के साथ या अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. जिनमें से कई दल ऐसे है जिनका अन्य राज्यों में बीजेपी के साथ गठबंधन है.

जातिगत समीकरण साधने को तैयार ये दल

बिहार की सत्ता में काबिज जेडीयू यूपी में 2017 में भी चुनाव लड़ने का ऐलान किया था, लेकिन बाद में बीजेपी से बातचीत के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव नहीं लड़ था. नीतीश की पार्टी को यूपी से इसलिए ज्यादा उम्मीदें है क्योंकि वो जिस जाति से आते हैं वो यूपी में दूसरी सबसे बड़ी ओबीसी जाति कुर्मी है. जो यूपी के करीब 2 दर्जनों से अधिक जिलों में जीतने या किसी को जितान की स्थिति में हमेशा रहता है. जेडीयू की नजर इन्हीं वोटर्स पर है. वहीं, वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश साहनी निषाद वोटर के सहारे यूपी के दंगल में कूद पड़े है. यूपी में निषाद वोटर्स अधिक होने के चलते साहनी उन्हीं के सहारे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. जिसके लिए वो पूर्व सांसद फूलनदेवी के नाम के सहारे अपनी जमीन मजबूत करना चाहते हैं क्योंकि फूलन निषाद समुदाय से आती थी और इस समुदाय में फूलनदेवी का आज भी बहुत सम्मान है.

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दलित और मुस्लिम के सहारे ये दल

बिहार के हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के सुप्रीमो व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी यूपी में दलित वोटर को साधने की रणनीति बनाकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. वहीं, मुस्लिम वोटर्स को अपनी तरफ कर गठजोड़ कर यूपी में एआईएमआईएम के चीफ औवेसी भी पार्टी के लिए जमीन तलाश रहे हैं और औवेसी लगातार प्रदेश में इसको लेकर दौरे भी कर रहे हैं.

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हिंदुत्व और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर आगे आए ये दल

महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ पार्टी शिवसेना भी यूपी में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. इसके लिए वो भाजपा के विरोध में हिंदुत्व के मुद्दे को लाकर चुनाव की तैयारी कर रही है. वहीं, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी भी यूपी चुनाव में भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर आगे आने का प्रयास कर रही है.

सी वोटर के सर्वे में 6 फीसदी में सभी अन्य दल

यूपी विधानसभा चुनाव में लड़ने को कई दल अन्य राज्यों से आ रहे हैं, लेकिन एबीपी- सी वोटर की बात करें तो यह दल सिर्फ 6 से 10 सीटों के बीच सिमटे दिखाई पड़ रहे हैं. इनके आने से अन्य पार्टियों के वोट शेयर में काफी असर नहीं देखने को मिलेगा.

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