राहत! कोरोना मरीज होगें सीधे भर्ती, सीएमओ के रेफरल लेटर की अनिवार्यता समाप्त

Smart News Team, Last updated: Thu, 22nd Apr 2021, 8:10 PM IST
  • अब कोरोना मरीजों को सीएमओ के यहां गुहार लगाने की जरूरत नहीं होगी और न ही मरीज के परिजन सीएमओ के मोहताज होगें. क्योंकि उप्र. मानवाधिकार आयोग ने अब भर्ती के लिए रेफरल लेटर की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है.
राहत! कोरोना मरीज होगें सीधे भर्ती, सीएमओ के रेफरल लेटर की अनिवार्यता समाप्त (फाइल फ़ोटो)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के कोविड अस्पतालों में भर्ती होने के लिए अब कोरोना मरीजों को सीएमओ के यहां गुहार लगाने की जरूरत नहीं होगी और न ही मरीज के परिजन सीएमओ के मोहताज होगें. क्योंकि उप्र. मानवाधिकार आयोग ने अब भर्ती के लिए रेफरल लेटर की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है. अयोग के इस फैसले के बाद अब वह किसी भी कोविड अस्पताल में बेड खाली होने पर सीधे भर्ती होने का अधिकार रखते हैं. पहले की व्यवस्था में कोरोना मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराने के लिए भर्ती तभी हो पाती थी, जब सीएमओ दफ्तर से उसको अनुमति पत्र मिलता था.

इसके लिए मरीज कई दिनों तक कोविड कंट्रोल रूम व सीएमओ दफ्तर का चक्कर काटते थे. इसको लेकर कई जगह सीएमओ ऑफिस या कोवीड कंट्रोल सेंटर के बाहर झड़पे भी होती थी. मानवाधिकार आयोग ने मंगलवार इससे संबंधित राज्य सरकार को कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा हैं कि गंभीर कोरोना मरीजों को रेफरल सिस्टम या सीएमओ के लेटर की जटिल प्रक्रिया को खत्म कर तत्काल बेड उपलब्ध कराए जाएं. साथ ही प्रत्येक अस्पताल के बाहर कोविड मरीजों के लिए कितने बेड खाली हैं और कितने भरे हैं.

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इसकी सूचना भी स्पष्ट रूप लिखवाई जाए और इसमें और पारदर्शिता लाई जाए. आयोग ने ये भी कहा हैं कि कोरोना मरीजों की भर्ती में सीएमओ के पत्र के कारण अड़चन आ रही है. मरीज एक से दूसरे अस्पताल भटक रहे हैं. सीएमओ का रेफरेंस लेटर के पाने को धक्के खाने पड़ रहे हैं. न्यायमूर्ति केपी सिंह और सदस्य ओपी दीक्षित की ओर से यह आदेश जारी किया गया है. इसमें यह भी कहा गया हैं कि अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह पर मरीजों को सीधे भर्ती किया जाए. इसके लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा अनुमति पत्र की कोई जरूरत नहीं है. निर्देशों का पालन करवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को जिम्मेदारी सौंपी गई है.

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लखनऊ में आज कोरोना के 5239 नए संक्रमित मिले. वहींं इलाज के दौरान 6207 ठीक होने पर घर भेजे गए. तो वहीं 24 घण्टे में 19 मरीजों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

 

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