जातिगत समीकरण साधने विधानसभा उपाध्यक्ष चुनाव में SP उतार सकती पिछड़े वर्ग का प्रत्याशी

Shubham Bajpai, Last updated: Fri, 15th Oct 2021, 7:36 AM IST
  • यूपी में 18 अक्टूबर को होने वाले विस उपाध्यक्ष के पद के लिए होने वाले चुनाव में सपा पिछड़े वर्ग का प्रत्याशी उतार सकती है. इस चुनाव को सपा हारने-जीतने की बजाय जातिगत समीकरण साधने की तौर पर देख रही है. जहां भाजपा वैश्य समाज को साधने की कोशिश कर रहा है. तब सपा का यह दांव भाजपा की मुश्किल बढ़ा सकता है.
जातिगत समीकरण साधने विधानसभा उपाध्यक्ष चुनाव में SP उतार सकती पिछड़े वर्ग का प्रत्याशी (फोटो सभार पीटीआई)

लखनऊ.यूपी में 17 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपाध्यक्ष पद के नामांकन में सपा पिछड़े वर्ग से प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है. जहां भाजपा वैश्य समाज को साधने की कोशिश कर रही है, वहीं, सपा का पिछड़े को प्रत्याशी बनाना पूरी तरह से राजनीतिक समीकरण बदल सकता है. माना जा रहा है सपा सीतापुर से विधायक नरेंद्र वर्मा को प्रत्याशी बना सकती है. हालांकि संख्याबल के अनुसार, सपा जीत तो नहीं पाएगी लेकिन विधानसभा चुनाव में जातिगत समीकरण बदलने का प्रयास कर सकती है.

 दिलचस्प बात यह होगी कि दोनों ही सपा के विधायक आमने-सामने डिप्टी स्पीकर की कुर्सी के लिए चुनाव में उतरेंगे. क्योंकि, माना जा रहा है भाजपा सपा के हरदोई से विधायक व नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल को मैदान में उतार सकती है.  नितिन अग्रवाल अभी विधानसभा में सपा के विधायक के तौर पर हैं.

सपा ने मंगवाया नामांकन पत्र

यूपी विधानसभा डिप्टी स्पीकर के लिए समाजवादी पार्टी ने सचिवालय ने नामांकन पत्र मंगवा लिया है. हालांकि सपा की ओर से कोई आधिकारिक नाम की घोषणा नहीं की गई है. इस सीट पर सपा पिछड़े वर्ग से प्रत्याशी खड़ाकर 2022 चुनाव में सियासी समीकरण बदलने का प्रयास कर रही है. क्योंकि इस सीट में अभी तक भाजपा की ओर से वैश्य समाज के प्रत्याशी के नाम की चर्चा है.

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दोनों ओर होंगे सपा के विधायक

प्रत्याशी की बात करें तो भाजपा सपा के कद्दवर नेता रहे नरेश अग्रवाल के बेटे और हरदोई से सपा विधायक नितिन अग्रवाल को प्रत्याशी बना सकती है. नितिन अभी तकनीकी तौर पर सदन में सपा के विधायक है. वहीं, सपा सीतापुर से नरेंद्र वर्मा को प्रत्याशी बना सकती है. दोनों ओर सपा के प्रत्याशी होने से चुनाव में काफी उटापटक देखने को मिल सकती है. जहां इस चुनाव में भाजपा वैश्य समाज को तो वहीं, सपा पिछड़े वर्ग को साधने का प्रयास कर रही है.

जीतने के लिए नहीं समीकरण बदलने सपा लड़ सकती चुनाव

डिप्टी स्पीकर पद पर सपा सिर्फ 2022 चुनाव से पहले जातिगत समीकरण साधने का प्रयास कर रही है. क्योंकि संख्याबल के आधार पर देखा जाए तो सपा काफी कमजोर है. जिसके चलते जीत भाजपा की लगभग तय है, लेकिन सपा इस चुनाव में अगड़े पिछड़े की राजनीति को हवा दे देगी जो विधानसभा चुनाव में सरगर्मी बढ़ा सकते हैं.

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17 अक्टूबर को नामांकन और 18 को होगा मतदान

सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के आधार पर 17 अक्टूबर को दोपहर 11 बजे से एक बजे तक नामांकन किया जाएगा. जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सर्वदलीय बैठक बुलाएंगे. साथ ही विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित कार्यमंत्रणा की बैठक बुला सकते हैं. वहीं, 18 अक्टूबर को विधानसभा उपाध्यक्ष के लिए मतदान होगा.

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