यूपी विधान परिषद चुनाव तक कुछ यूं बदल सकते हैं प्रदेश की राजनीति के समीकरण

Smart News Team, Last updated: 30/10/2020 11:50 AM IST
  • उत्तर प्रदेश की राजनीतिक हवा में कई नए समीकरण बनते और बिगड़ते दिख रहे हैं.
यूपी विधान परिषद चुनाव तक कुछ यूं बदल सकते हैं प्रदेश की राजनीति के समीकरण

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लिए राज्यसभा चुनाव के चलते प्रदेश की राजनीति के दो अहम पार्टियों सपा-बसपा के बीच कमकश बढ़ती जा रही है. इस जंग का अगला पड़ाव विधान परिषद चुनाव देखा जा रहा है. बसपा प्रमुख मायावती ने इसी चुनाव में सपा को सबक सिखाने की ठानी है. यूपी में दो विपक्षी दलों के बीच टकराहट से एक ओर भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता बिखर गई है, वहीं नए गठबंधन के लिए भी बिसात बिछ रही है.

आपको बता दें इस नए गठबंधन में जहां भाजपा बसपा करीब आते दिख रहे हैं, तो वहीं सपा कांग्रेस एक बार फिर नजदीक आ सकते हैं. चुनावी जानकारो का कहना है परिषद चुनाव आते-आते कई समीकरण बदलेंगे. अगर विधान परिषद चुनाव की बात करें तो विधानसभा क्षेत्र वाली विधान परिषद की यह 12 सीटें 30 जनवरी 2021 को खाली हो रही हैं. इस तरह संख्या बल के हिसाब से इसमें भाजपा 9 सीटें, सपा एक सीट पक्की तौर पर जीतेंगे. सपा की छह सीट हैं तो उसे पांच सीट का नुकसान होगा. बसपा व कांग्रेस अपने बूते एक भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं हैं. अब दो सीटों के लिए चारों दलों में साठ-गांठ होगी.

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अब तक सपा के पास अपने 16 सरप्लस वोट हैं. अगर उसे बसपा के बागी सदस्यों व अन्य का समर्थन मिल गया तो यह सीट सपा निकाल सकती है. यही वह मुद्दा है जिसके लिए मायावती ने सपा को सबक सिखाने का ऐलान किया है यानी किसी भी कीमत पर सपा को दूसरी सीट न जीतने देना. 

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बसपा की यह मुहिम तभी कामयाब हो पाएगी जब भाजपा उसके लिए अघोषित तौर पर मदद करे जैसा उसने राज्यसभा चुनाव के लिए किया. कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा अपना दसवां प्रत्याशी भी उतार सकती है. अगर भाजपा दस, सपा दो प्रत्याशी उतार दे तो और बसपा भी प्रत्याशी उतारे या कोई पर्दे के पीछे किसी के समर्थन से निर्दलीय आ जाए तो चुनाव हो जाएगा. 

 

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