लॉकडाउन में यूपी के इस गांव के बच्चे बने कमाल के जिमनास्ट, जानें कैसे ली ट्रेनिंग

Smart News Team, Last updated: Tue, 8th Jun 2021, 11:36 PM IST
  • उत्तर प्रदेश के एक गांव के कुछ बच्चे लाॅकडाउन में कमाल के जिमनास्ट बन गए हैं. रोज शाम को गांव के बच्चे कोच सोनू वर्मा के साथ प्रैक्टिस करते हैं. गांव के बच्चे अब बैक क्लिप, फ्रंट क्लिप, कार्टव्हील और विण्डव्हील कर लेते हैं. कोच इन बच्चों को यूपी सरकार के जिमनास्टिक हाॅस्टल में ट्रायल में उतारेंगे. 
लाॅकडाउन में यूपी के इस गांव के बच्चे कमाल के जिमनास्ट बन गए हैं.

अनंत मिश्र, लखनऊ. वंश और आयुष के माता-पिता ने पिछले साल उनका स्कूल में नर्सरी में दाखिला कराया था। कोरोना लॉडडाउन के कारण तब से दोनों एक दिन भी स्कूल नहीं गया। पर चार वर्षीय वंश और पांच वर्षीय आयुष ने इस सवा साल में वह काम सीख लिया जो किसी गांव के बच्चे से उम्मीद नहीं कर सकता। दोनों अपने आयु वर्ग में कमाल का जिमनास्ट बन गए हैं। दोनों दस से भी ज्यादा समरशाल्ट वाली बैक फ्लिप, फ्रंट फ्लिप, कार्टव्हील, विण्डव्हील कर लेते हैं। सिर्फ अंश नहीं सैदपुर और सरोसा के सुजीत और शांतनु भी लॉकडाउन में कमाल के जिमनास्ट बन गए हैं।

हैरतगंज कलाबाजी करते बच्चे.

सुबह- शाम करते हैं ट्रेनिंग

ये सभी बच्चे सुबह और शाम गांव के एक मैदान पर इकट्ठा होते हैं। खुद फावड़े से मिट्टी खोदकर भुरभुरी करते हैं। इसके बाद इनके कोच सोनू रावत हल्के वार्मअप के बाद इन्हें ट्रेनिंग कराने में जुट जाते हैं। जब मौसम खराब होता है तो सभी बच्चे गांव के एक जर्जर बारातघर में अभ्यास करते हैं। इन बच्चों के पिता मजदूरी करते हैं। कुछ छतों की स्लैब के लिए सरिया के जाल बांधते हैं। इन बच्चों ने गांव में अपने सोनू रावत की देखा-देखी ट्रेनिंग शुरू कर दी थी।

गांव के बच्चों को कोच जिमनास्ट के ट्रेनिंग देते हैं.

कमाल के जिमनास्ट हैं

सोनू रावत ने बताया कि सभी बच्चे बेहद प्रतिभाशाली हैं। इतनी कम उम्र बिना किसी मदद के इतनी उम्दा जिमनास्टिक करना बड़ी बात है। चार साल का वंश और पांच साल के आयुष 40 मीटर तक बैक प्लिट या फ्रंट प्लिप कर लेते हैं। साइड या विन्ड प्लिप इस उम्र में करना हैरत भरा है। ये सभी बच्चे अपने आप ट्रेनिंग करने आते हैं। किसी को बुलाना नहीं पड़ता है।

यूपी सरकार का खेल विभाग जिमनास्टिक हाॅस्टल का संचालित करता है.

खेल विभाग के हास्टल में देंगे ट्रायल

राज्य का खेल विभाग जिमनास्टिक के हॉस्टल संचालित करता है। इतनी कम उम्र में ये बच्चे बेहद प्रतिभाशाली हैं। सोनू रावत इन बच्चों को इन हॉस्टल के ट्रायल में उतारेंगे। इन बच्चों का हॉस्टल में अगर चयन हो जाता है तो इनकी जिन्दगी बन जाएगी। ये आगे चलकर देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत सकेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से तालुक रखने वाले इन बच्चों को मुफ्ट में पढ़ाई-लिखाई, रहने और खेलने की सुविधा मिलेगी।

 

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