यूपी के रिटायर्ड कर्मचारी को नहीं मिल रही ग्रेच्युटी, कर्मचारियों ने दी यह धमकी

Haimendra Singh, Last updated: Mon, 8th Nov 2021, 9:30 AM IST
  • लखनऊ के 200 से अधिक रिटायर्ड कर्मचारियों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद ग्रेजुएटी का भुगतान नहीं हो रहा है. कर्मचारियों न प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, सहकारिता मंत्री आदि से मदद की गुहार लगाई हैं. कर्मचारियों का कहना है कि भुगतान न होने पर कर्मचारियों आयुक्त कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे.
यूपी के रिटायर्ड कर्मचारियों को नहीं हो रहा ग्रेजुएटी कर भुगतान.( सांकेतिक फोटो )

लखनऊ. यूपी के 200 से अधिक रिटायर्ड आधिकारी और कर्मचारी इन दिनों परेशान है. सेवानिवृत्ति होने के बाद कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जा रहा है जिसपर संबंधित विभाग घाटा होने के कारण ग्रेच्युटी का भुगतान न करने की दलील दे रहा है. कर्मचारियों का कहना है कि केंद्र व प्रदेश सरकार ने 29 मार्च 2018 से ग्रेच्युटी में मिलने वाली रकम को अधिकतम 20 लाख रुपए कर दिया है लेकिन कंपनियां भुगतान नहीं कर रही है. भुगतान न होने पर कर्मचारियों ने कहा है कि वह आयुक्त कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन करेंगे. आइए जानते हैं क्या होती है ग्रेजुएटी और किसे इसका लाभ मिलता है.

मिली जानकारी के अनुसार, कर्मचारियों की ग्रेच्युटी को लेकर समय-समय पर संशोधन होते रहे हैं. 29 मार्च, 2018 को पेमेंट आफ ग्रेच्युटी अमेंडमेंट एक्ट लागू होने पर ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया. पीसीएफ के प्रबंध निदेशक ने इस आदेश को स्थगित करके एक कमेटी का गठन किया, लेकिन तीन साल में न तो इस कमेटी की कोई बैठक हुए न तो कार्य संपन्न हुआ. ग्रेच्युटी मांगने पर विभागीय अफसर घाटा होने की दलील दे रहे है. कार्मिकों का कहना है कि उन्हें सरकार की ओर से घोषित ग्रेच्युटी नहीं दी जा रही है.

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क्या है ग्रेच्युटी

पेमेंट ऑफ ग्रेच्‍युटी एक्‍ट, 1972 के तहत किसी भी कंपनी में पांच साल या उससे ज्यादा नौकरी करने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी लाभ मिलता है. ग्रेच्‍युटी रिवार्ड होता है जो कंपनी के सेवानिवृत्ति कर्मचारियों एक ही कंपनी में लंबे समय तक काम करते है उन्हें सैलरी, पेंशन, प्रोविडेंट फंड के अलावा ग्रेच्युटी भी दी जाती है. यदि कर्मचारी कंपनी की सारी शर्तों को पूरा करता है तो कर्मचारी को गांरटी तौर पर किया जाना चाहिए. ग्रेच्युटी का छोटा हिस्सा कर्मचारी की सैलरी से कटता है, लेकिन बड़ा हिस्सा कंपनी की तरफ से दिया जाता है.

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