योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 72 हजार से ज्यादा शिक्षकों के ट्रांसफर की तैयारी शुरू

Smart News Team, Last updated: 15/12/2020 06:13 PM IST
  • केंद्र सरकार ने यूपी के सरकारी स्कूलों में तैनात 72,353 शिक्षकों को मांग से अधिक बताते हुए कहा है कि इनकी तैनाती नियमों के मुताबिक की जाए. प्रदेश में कई स्कूल ऐसे हैं, जहां शिक्षक तो 6-7 तैनात हैं लेकिन बच्चे 100 से ज्यादा नहीं है.
घरों में आइसोलेट हुए बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक को ऑन ड्यूटी माना जाएगा.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 72 हजार से ज्यादा ऐसे शिक्षक हैं, जिनकी तैनाती ऐसी जगह जहां उनकी जरूरत ही नहीं यानी मांग से अधिक उपलब्धि है. शिक्षा का अधिकार कानून लागू हुए नौ साल से ऊपर हो गया लेकिन अब भी आरटीई राइट टु एजुकेशन के मानकों के मुताबिक शिक्षकों की तैनाती स्कूलवार नहीं हो पाई है. अब बेसिक शिक्षा विभाग मांग से अधिक शिक्षकों को पहले अंतर्जनपदीय तबादले और इसके बाद जिलों में तबादलों व समायोजन के जरिए मानकों के मुताबिक तैनाती करने की जुगत में लगा है .

इसमें ऑनलाइन व्यवस्था मददगार साबित हो सकती है क्योंकि विभाग में मांग से अधिक शिक्षकों का मुद्दा नया नहीं है. केंद्र सरकार ने यूपी के सरकारी स्कूलों में तैनात 72,353 शिक्षकों को मांग से अधिक बताते हुए कहा है कि इनकी तैनाती नियमों के मुताबिक की जाए. आरटीई के मानकों के मुताबिक कक्षा एक से 5 तक 30 बच्चों पर एक शिक्षक का नियम है. 

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वहीं जूनियर स्कूलों में 35 बच्चों पर एक शिक्षक का नियम बनाया गया है, लेकिन प्रदेश में कई स्कूल ऐसे हैं, जहां शिक्षक तो 6-7 तैनात हैं लेकिन बच्चे 100 से ज्यादा नहीं है. ज्यादातर शहरी स्कूलों और शहर से सटे ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की संख्या ज्यादा है. जब प्रदेश में आरटीई लागू हुआ तो स्कूलों में नामांकन का खेल चलने लगा.

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एक ही बच्चा आसपास के सभी स्कूलों में पंजीकृत किया जाने लगा. इससे निपटने के लिए सरकार ने नामांकित बच्चों की जगह मिड डे मील खाने वाले बच्चों की संख्या के मुताबिक तैनाती का नियम बनाया लेकिन अनुपात सही करने में विभाग असफल रहा है. 

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 इससे पहले भी सरप्लस शिक्षकों का मुद्दा उठता रहा है लेकिन विभाग लाख कोशिशों के बाद भी इसे सही नहीं कर पा रहा है क्योंकि भर्तियों के समय बागपत का अभ्यर्थी भी श्रावस्ती में नियुक्ति ले लेता है लेकिन तीन साल बाद पैरवी के सहारे वह अपने जिले में तबादला लेकर पहुंच जाता है. इसके चलते हमेशा असंतुलन की स्थिति बनी रहती है.

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