UPPSC पीसीएस 2018 स्केलिंग विवाद: हाई कोर्ट ने चयनित ‌अभ्यर्थियों को थमाया नोटिस

Naveen Kumar, Last updated: Tue, 15th Feb 2022, 9:54 AM IST
  • उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित ​पीसीएस 2018 में स्केलिंग विवाद को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है. याचिका में पीसीएस 2018 की मुख्य परीक्षा के परिणाम और अंतिम चयन सूची को चुनौती देते हुए रद्द करने की मांग की है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

लखनऊ. पीसीएस-2018 में स्केलिंग का विवाद गहराता जा रहा है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है. पीसीएस 2018 में स्केलिंग को लेकर अभयर्थी अखंड प्रताप सिंह ने होई कोर्ट में याचिका दायर की थी. जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने पीसीएस 2018 में चयनित अभ्यर्थियों को नोटिस थमाया है. याचिका में पीसीएस 2018 की मुख्य परीक्षा के परिणाम और अंतिम चयन सूची को चुनौती देते हुए रद्द करने की मांग की है. कोर्ट ने वैकल्पिक विषय वाले इन अभ्यर्थियों को स्केलिंग लागू नहीं किए जाने पर अपना पक्ष रखने की बात कही है.

होई कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि लोक सेवा आयोग द्वारा ​पीसीएस 2018 की मुख्य परीक्षा आयोजित की गई थी. भर्ती के लिए छह जुलाई 2018 को विज्ञप्ति जारी की गई थी, जिसमें क्लाज 15 के सब क्लाज 13 में साफ तौर पर कहा गया कि वैकल्पिक विषय में स्केलिंग लागू होगी. लेकिन, परीक्षा का परिणाम वैकल्पिक विषय में बिना स्केलिंग के अंकों के आधार पर जारी किया गया. ऐसे में लोक सेवा आयोग ने विज्ञापन में ‌दी गई शर्त का उल्लंघन किया है. इससे परिणाम पर भी असर पड़ा है.

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वहीं, आयोग का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का हलावा लिया और कहा कि स्केलिंग कतिपय मामलों में लागू करने की आवश्यकता होती है. उन्होंने कहा कि मामले को लेकर आयोग की ओर से एक कमेटी गठित की थी. कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ विषयों में अभ्यर्थियों को मिलने वाले अंकों में ज्यादा अंतर नहीं है, ताकि स्केलिंग लागू करना पड़े. इसलिए आयोग की ओर से इस रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा आयोजित की गई है.

कोर्ट ने सुनवाई करते हुए आयोग ने पूछा, "क्या आपके पास यह विकल्प है कि विज्ञापन में घोषित शर्त के बावजूद कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर स्केलिंग लागू करे." कोर्ट ने कहा ​​कि बिना चयनित अभ्यर्थियों का पक्ष जाने फैसला लेना उचित नहीं होगा. इसके लिए चयनित अभ्यर्थियों को भी अपना पक्ष रखना होगा.

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