मक्का के काबे जैसी हो सकती है अयोध्या मस्जिद, ना होगी कोई गुंबद, ना मिनार !

Smart News Team, Last updated: 20/09/2020 06:36 PM IST
अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का क्षेत्रफल बाबरी मस्जिद के बराबर ही होगा. इसका नाम किसी भाषा या राजा के नाम पर नहीं होगा. साथ ही इसकी इमारत मक्का की काबा शरीफ की तरह भी हो सकती है.
अयोध्या मस्जिद मक्का की काबा शरीफ की तरह भी हो सकती है.

 लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अयोध्या के धन्नीपुर गांव में बनने वाली मस्जिद 15 हज़ार वर्ग फीट में बनाई जाएगी. गौरतलब है कि इसका क्षेत्रफल बाबरी मस्जिद के बराबर ही होगा. रविवार को इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (आईआईसीएफ) के सचिव और प्रवक्ता अतहर हुसैन ने यह जानकारी दी. सचिव ने बताया कि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मिली जमीन पर बनने वाली मस्जिद का नाम किसी भाषा या राजा के नाम पर नहीं होगा. इसके अलावा मस्जिद की बनावट भी परंपरागत रूप से अलग हो सकती है.

आईआईसीएफ सचिव ने बताया कि इस मस्जिद का आकार बाकी मस्जिदों से अलग होगा. यह मक्का की काबा शरीफ की तरह चौकोर भी हो सकता है. मस्जिद में कोई गुंबद या मीनार नहीं होगी. मस्जिद के वास्तुशास्त्री नियुक्त किए गए प्रोफ़ेसर एसएम अख्तर ने अपने बयानों में इस ओर इशारा भी किया है. हालांकि अभी इसके बारे में कुछ भी तय नहीं हुआ है.

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सचिव में यह भी बताया कि देश-विदेश में मस्जिदों की स्थापत्य कला और वास्तुकला उस क्षेत्र के लोगों या उसके निर्माणकर्ता के देश की मान्यता के अनुसार ही तय की जाती है. इसलिए यह जरूरी नहीं है कि वह विशुद्ध इस्लामी ही हो.

सचिव अख्तर हुसैन ने बताया कि काबा इस्लामिक आस्था की आदिकाल इमारत है. इसलिए इस मस्जिद का स्वरूप अगर काबा जैसा ही हो तो वह बेहतर है. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट ने वास्तुशास्त्री अख्तर को पूरी छूट दे रखी है. मस्जिद के मामले में वे जैसे चाहे वैसे काम कर सकते हैं.उन्होंने यह भी कहा कि मेरी निजी राय है कि मस्जिद का नाम धन्नीपुर मस्जिद रखा जाना चाहिए.

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सचिव के अनुसार इंडो इस्लामिक कल्चरल ट्रस्ट ने अपना एक पोर्टल तैयार किया है. इसके माध्यम से लोग, मस्जिद, संग्रहालय, अस्पताल और रिसर्च सेंटर के लिए चंदा दे सकते हैं. पोर्टल पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस्लामिक विद्वानों से लेख और विचारों की लिए भी मदद ली जाएगी. सचिव ने बताया कि अभी पोर्टल पर कुछ काम बाकी है. इस कारण से अभी चंदा जमा करने का काम शुरू नहीं हुआ है.

आपको बता दें कि उच्च न्यायालय ने पिछले साल नवंबर में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद मामले में फैसला सुनाते हुए विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण कराने और मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या के ही किसी प्रमुख स्थान पर 5 एकड़ जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था. कोर्ट के आदेश पर सरकार से मिली 5 एकड़ जमीन पर मस्जिद, इंडो इस्लामिक रिसर्च सेंटर, संग्रहालय और अस्पताल बनाने का जिम्मा इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन को मिला है.

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