यूपी में शहरीकरण का हिस्सा हुईं 587 पंचायतें, सिमटने लगी गांवों की सरकार

Smart News Team, Last updated: 17/09/2020 09:05 AM IST
  • यूपी में बढ़ते शहरीकरण से गांव की सीमाओं के साथ सरकारें भी सिमटने लगी हैं. 2015 में हुए पंचायती राज चुनाव के 587 ग्राम पंचायतें पूर्ण रूप से शहरी क्षेत्रों में शामिल हो गई हैं. वहीं 680 पंचायतें आंशिक रूप से शहरीकरण का हिस्सा हुई हैं.
यूपी शहरीकरण में 587 पंचायतें पूरी तरह से हुई खत्म.

लखनऊ. यूपी में बढ़ते शहरीकरण से गांवों की सरकार सिमटने लगी है. 2015 में हुए पंचायती चुनाव के बाद प्रदेश में कोई पंचायत गठित नहीं हुई. वहीं सैकड़ों पंचायते पूरी या आंशिक तौर पर शहरी क्षेत्रों में शामिल हो गई हैं. इससे प्रधानों और पंचों की संख्या घट जाने की संभावना जताई जा रही है.

पंचायतीराज विभाग से राज्य निर्वाचन आयोग को सूचना दी गई कि प्रदेश में अबतक 587 ग्राम पंचायतें पूरी तरह और 680 पंचायतें आंशिक रूप में शहरी क्षेत्रों में शामिल हो गई हैं. शहरीकरण में जिन क्षेत्रों की आबादी अगर एक हजार से कम हो जाती है तो ऐसी पंचायतों को बाकी के बचे वार्ड किसी अन्य पंचायत में शामिल किए जा सकते हैं.

पंतायतीराज विभाग अनुमान है कि अगले कुछ समय में करीब दो से तीन हजार ग्राम पंचायत सदस्यों के पद भी खत्म हो जाएंगे. अबतक 587 पद ख्तम हो गए हैं.   

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उत्तर प्रदेश के अपर निर्वाचन आयुक्त वेद प्रकाश वर्मा के अनुसार जो पंचायतें पूरी तरह से शहरी क्षेत्रों में चली गई हैं वहां ग्राम प्रधान और पंचायत सदस्यों के पद खत्म हो गए हैं.

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जिन पंचायतों को आंशिक रूप से शहरी क्षेत्रों में शामिल किया गया है उनके बारे में सरकार को निर्णय लेना होगा कि 1 हजार से आबादी कम होने पर उनका अस्तित्व कायम रहेगा या उन्हें किसी अन्य वार्ड की पंचायत में शामिल किया जाएगा. फिलहाल इस मामले पर चर्चा काफी जोरों पर हैं.

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