चित्रकूट जेल गैंगवार: मुख्तार के भांजे की हत्या करने वाला अंशू दीक्षित कौन है ?

Smart News Team, Last updated: Sat, 15th May 2021, 11:15 PM IST
  • चित्रकूट जेल में बाहुबली मुख्तार अंसारी के भांजे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात मुकीम काला की बैरक में गोली मारकर हत्या कर दी गई. बताया जा रहा है की इनकी हत्या अंशु दीक्षित ने कर दी.
चित्रकूट जेल गैंगवार: मुख्तार के भांजे की हत्या करने वाला अंशू दीक्षित कौन है ? 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार पर एक बार फिर सवालिया निशान उठने लगें हैं. जब चित्रकूट जेल में बाहुबली मुख्तार अंसारी के भांजे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात मुकीम काला की बैरक में गोली मारकर हत्या कर दी गई. बताया जा रहा है की इनकी हत्या अंशु दीक्षित ने कर दी. लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व महामंत्री विनोद त्रिपाठी की हत्या के मामले में जेल में बंद आरोपी अंशु दीक्षित में मामले कोर्ट में सुनवाई अपने अंतिम दौर में चल रही है. 

वर्ष 2007 11 दिसंबर को लखनऊ के नेहरू एनक्लेव में अचानक गोलियां तड़तडाई जिसमेें लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व महामंत्री विनोद त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या की गई थी. जांच में नाम सामने आया अंशू त्रिपाठी का राजधानी में एलयू के पूर्व महामंत्री की हत्या का मामला काफी तूल पकड़ा था. इतना ही नहीं अंशू इस हत्याकांड के बाद इस हत्याकांड के सरकारी गवाह और बसपा के पूर्व एमएलसी की हत्या करने की फिराक में था. गिरफ्तारी के डर से अंशू जब फरार हुआ था तब बसपा एमएलसी हेमन्त सिंह ने गनर की भी मांग की थी.

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अंशू और सुधाकर कौन हैं

एलयू के पुर्व महामंत्री की हत्या के बाद सुधाकर लंबे समय से फरार चल रहा था. सुधाकर पाण्डेय और अंशू त्रिपाठी ने मिलकर कई वारदात को एक साथ अंजाम दिया था. मुन्ना बजंरगी की वर्ष 2018 में हत्या के बाद सुधाकर हाजिर हुआ था. सुधाकर इस समय गोण्डा जेल में बंद हैं. अंशू और सुधाकर ने मिलकर कई अपराधिक वारदातें की है. अंशू का सीतापुर से एमएलसी रहे भरत त्रिपाठी व उसके बेटे परीक्षित से भी छत्तीस का आंकड़ा रहा था. एसटीएफ ने जब वर्ष 2014 में अंशू दीक्षित को पकड़ा था तो उसने खुलासा किया था कि वह इन दोनों की हत्या करने की भी योजना बना रहा था. अंशू पर सीतापुर पुलिस पांच हजार रुपये और मध्य प्रदेश पुलिस 10 हजार का इनाम भी घोषित कर चुकी थी. इसके अलावा बसपा के पूर्व एमएलसी से भी उसने दुश्मनी ठान रखी थी.
 

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एसटीएफ के सीओ बाल-बाल बचे थे

एसटीएफ ने जब अंशू को घेरा था तो उसकी फायरिंग में तत्कालीन सीओ विकास चन्द्र त्रिपाठी, एसआई सत्य प्रकाश सिंह, सिपाही अनूप कुमार और भानू प्रताप सिंह बाल-बाल बचे थे. उस समय अंशू के पास अलग-अलग नाम से कई पहचान पत्र मिले थे. सभी पर फोटो उसकी ही लगी हुई थी.

 

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