यूपी में कम हो सकते हैं पुलिस कमिश्नर के अधिकार, DM को फिर मिल सकती हैं ये पावर

Smart News Team, Last updated: Tue, 24th Nov 2020, 8:40 PM IST
  • उत्तर प्रदेश में पुलिस कमिश्नर के अधिकारों में कटौती हो सकती है. वहीं जिला अधिकारी को सीआरपीसी की धारा 133 व 145 के तहत कार्रवाई के अधिकार वापस दिए जा सकते हैं.
कम हो सकते हैं पुलिस कमिश्नर के अधिकार, DM को फिर मिल सकती है ये पावर

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में पुलिस कमिश्नर के अधिकारों में कटौती की जा सकती है. जबकि जिला अधिकारी को कटौती किए जा रहे अधिकारों को वापस सौंपे जा सकते हैं. इस बाबत शासन ने गौतमबुद्ध नगर और लखनऊ के डीएम से एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है. योगी सरकार दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 133 और 145 के तहत कार्रवाई का अधिकार फिर से जिला मजिस्ट्रेट को देने पर विचार कर रही है. दोनों ही धाराएं जमीन से जुड़े विवादों में कार्रवाई से संबंधित हैं.

गौरतलब है कि अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने लखनऊ और नोएडा के जिला अधिकारियों को पत्र लिखकर दोनों धाराओं के तहत कार्रवाई का अधिकार फिर से जिला अधिकारी को ही सौंप दिए जाने के संबंध में एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.

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मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में सिर्फ दो जिले लखनऊ और नोएडा में कमिश्निरेट है. उत्तर प्रदेश के इन दोनों जिलों में कमिश्नर मॉडल लागू किया गया था. अगर इन दोनों जिलों में यह मॉडल सफल होता है तो और भी जिलों में यह व्यवस्था लागू की जा सकती है. 

क्या है सीआरपीसी धारा 133

जहां विधि के खिलाफ जमाव या लोक न्यूसेंस की शिकायत होती है तो वहां सीआरपीसी की धारा 133 लागू होती है. इस धारा के तहत कार्यपालक मजिस्ट्रेट को यह अधिकार होता है कि अगर उसे कहीं न्यूसेंस की शिकायत मिलती है और उससे लोक शांति भंग होने का खतरा है तो वह सभी पक्षों की सुनवाई करते न्यूसेंस हटाने का आदेश दे सकता है.

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क्या है सीआरपीसी धारा 145

वहीं धारा 145 वहां लागू की जाती है जहां जमीन के मालिकाना हक, कब्जे सीबीजल से संबंधित विवादों की वजह से लोक शांति भंग होने की संभावना बनी हो. गांवों में ऐसे विवाद ज्यादा देखने को मिलते हैं. इस धारा में पुलिस की रिपोर्ट पर कार्यपालक मजिस्ट्रेट कार्रवाई करता है.

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