करीब 500 साल बाद दीयों से जगमग होगी अयोध्या रामजन्मभूमि, मनाया जाएगा दीपोत्सव

Smart News Team, Last updated: Sat, 7th Nov 2020, 10:48 PM IST
  • दीपोत्सव 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ प्रधानमंत्री मोदी भी विडियो कांफ्रेंस के माध्यम से हिस्सा लेंगे. रामजन्मभूमि पर राममंदिर निर्माण शुरू होने के बाद पहले दीपोत्सव को लेकर भी लोगों में जबरदस्त उत्साह है.
रामजन्मभूमि अयोध्या को करीब 500 साल बाद दीयों के प्रकाश से रोशन किया जाएगा.

रामनगरी अयोध्या में इस बार दीपावली के मौके पर दीपोत्सव-2020 कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हिस्सा लेंगे. अयोध्या में करीब 492 साल बाद यह पहला मौका होगा, जब रामजन्मभूमि पर भी खुशियों के दीप जलेंगे. रामजन्मभूमि पर राममंदिर निर्माण शुरू होने के बाद पहले दीपोत्सव को लेकर भी लोगों में जबरदस्त उत्साह है. योगी सरकार अयोध्या में चौथा दीपोत्सव मना रही हैं.

दीपावली की पूर्व संध्या पर होने वाले दीपोत्सव-2020 में इस बार पिछला रिकार्ड तोड़ने की योजना है. कोविड गाइडलाइन का पूर्ण रुप से पालन करते हुए इस बार राम की पैड़ी पर इस बार 5.51 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे. खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दीपोत्सव के दिन राम जन्मभूमि पहुंचकर रामलला का दर्शन करने के बाद दीप प्रज्ज्वलित करेंगे. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी विडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इस दीपोत्सव से जुड़ेंगे. आगामी 11 से 13 नवंबर तक आयोजित होने वाले दीपोत्सव की एक-एक तैयारी इस समय जोरों शोरो पर है. मुख्यमंत्री योगी खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं.

 

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मुख्यमंत्री के आदेश के पर पहली बार वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से भी दीप प्रज्ज्वलित करने की व्यवस्था की गई है. कोविड-19 के कारण जो लोग अयोध्या नहीं पहुंच पाएंगे, दीपोत्सव के मौके पर अयोध्या में भव्य सजावट की गयी है. रामजन्मभूमि, कनक भवन, राम की पैड़ी व हनुमान गढ़ी सहित सभी मंदिरों में बिजली की सजावट की जाएगी. दीपोत्सव के अवसर पर सरयू जी की भव्य आरती की व्यवस्था भी की जा रही है.

 

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मंदिर आंदोलन में रही गोरक्षपीठ की भूमिका

आजादी के पहले से लेकर अब तक मंदिर आंदोलन में गोरक्षपीठ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 1949 में जब विवादित ढांचे के भीतर रामलला का प्रकटीकरण हुआ तो पीठ के तत्कालीन पीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ कुछ साधु-संतों के साथ वहां संकीर्तन कर रहे थे. बाद में उनके शिष्य ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ वर्ष 1984 में गठित रामजन्म भूमि मुक्ति यज्ञ समिति के आजीवन अध्यक्ष रहे. महंत अवेद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद बतौर पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने भी इस जिम्मेदारी को बखूबी संभाला है.

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