Chhath Puja 2021: अर्घ्य देने के लिए घाट तक दंडवत करती जाती है व्रती, जानें छठ में दंडवत प्रणाम का महत्व

Pallawi Kumari, Last updated: Wed, 10th Nov 2021, 7:32 AM IST
  • चार दिनों तक चलने वाले महापर्व छठ पर व्रती सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए नदी घाट पर जाती है. इस दौरान व्रती दंडवत प्रणाम करती हुई छठ घाट तक पहुंचती है. आज अस्ताचलगामी भगवान सूर्य देव को पहला अर्घ्य शाम को दिया जाएगा. आइये जानते हैं छठ पूजा में दंडवत प्रणाम का क्या महत्व होता है.
छठ में दंडवत प्रणाम का महत्व

लोक आस्था का महावर्व छठ का आज तीसरा दिन है. नहाय खाय और खरना पूजा के बाद आज अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को पहला अर्घ्य शाम को दिया जाएगा. इसे संध्या अर्घ्य भी कहा जाता है. इसके बाद कल गुरुवार को कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह सूर्योदय के समय उगते सूर्य को भोर का अर्घ्य दिया जाएगा. इसके साथ ही यह महापर्व संपन्न हो जाएगा. छठ पर्व अपनी सादगी और भक्ति भाव के लिए जाना जाता है. यही कारण है कि आज यह ग्लोबल पर्व के रूप में जाना जाने लगा है. 

छठ पर्व में लोग अपनी परपंरा और संस्कृति से जुड़े हुए कई विधि और नियम करते हैं. छठ पूजा में कई नियमों के साथ एक नियम दंडवत प्रणाम का भी है. सूर्य को अर्घ्य देने के लिए व्रती जमीन पर दंडवत प्रणाम करते हुए घाट तक पहुंची है. इस दौरान घर के परिजन भी उन्हें पैर छूकर प्रणाम करते हैं.

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दरअसल छठ महापर्व शक्ति व प्रकृति को समर्पित है. इसलिए भी व्रती जमीन पर दंडवत करते हुए घाटों तक जाती हैं. यह भी कहा जाता है कि जिन लोगों ने किसी मन्नत की कामना की होती है और वह पूरी हो जाती है तो साधारण कपड़े में जमीन पर लेटकर और नमस्कार करके छठ घाट पर जाने की मनन्त लेते हैं. दंडवत प्रणाम करते हुए व्रती घाट तक पहुंचती है और पवित्र नदी में स्नान कर छठी मईया की पूजा कर सूर्य को अर्घ्य देती है.

हिंदू धर्म में प्रणाम करने का काफी महत्व होता है. घर के बड़े बुजुर्ग हो या फिर देवी देवता प्रणाम करने से हमें उनका आशीर्वाद मिलता है. जमीन पर पेट के बल लेटकर प्रणाम करने के दंडवत प्रणाम कहा जाता है. इस तरह का प्रणाम करने से हर मनोकानाएं पूरी होती है और हर क्षेत्र में सफलता का आशीर्वाद मिलता है.

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