छठ की तैयारियों में जुटा उत्तर प्रदेश, पूजा के लिए लखनऊ सजकर तैयार

Smart News Team, Last updated: Sat, 6th Nov 2021, 10:24 PM IST
  • उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत सूबे के अलग अलग हिस्सों में लोकआस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है. पूर्वांचल में इसकी तैयारियां करीब करीब पूरी हो चली है. कार्तिक मास की षष्ठी के दिन पड़ने वाला यह पूजा इस साल 10 नवंबर को पड़ रहा है.
छठ पूजा करती व्रत महिलाएं

लखनऊ. लोकआस्था का महापर्व छठ अपने आप में बहुप्रचलित त्योहार है. इसको लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत सूबे के अलग अलग हिस्सों में तैयारियां जोर-शोर से चल रही है और कुछ जगह जैसे पूर्वांचल में तैयारियां करीब करीब पूरी हो चली है. इस बार यह पूजा 10 नवंबर को देशभर में मनाया जा रहा है. छठ पूजा की तैयारियों को लेकर अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय ने बताया कि राजधानी लखनऊ में छठ पूजा की सभी तैयारियां करीब-करीब पूरी हो चुकी है. आगे उन्होंने बेहद खास जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस बार की व्यवस्था कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए किया गया है. राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के घाटों पर बन रहे वेदी के नजदीक उन्हीं लोगों को जाने की अनुमति होगी जिन्होंने कोविड-19 की वैक्सीन का दोनों डोज लगवा लिया है.

छठ पूजा में घर की साफ-सफाई पर बहुत जोर दिया जाता है. और इसी को लेकर इन दिनों घर की महिलाएं पूरे जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई हैं. मान्यता ये है कि छठ पूजा प्रकृति देवी की पूजा है जिसे करने से परिवार में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य, सफल जीवन और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है इसके आलावा ये भी कहा जाता है कि छठी मईया नि:संतानों को संतान देती है और परिवार के सभी बच्चों की रक्षा भी करती हैं. आमतौर पर हिंदू धर्म में उगते सूरज को अर्घ्य देने का रीति रिवाज है मगर छठ इकलौता ऐसा महापर्व है जिसमें श्रद्धालु या व्रत रखने वाली महिलाएं डूबते सूरज को अर्घ्य देती हैं.

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इस साल छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक महिने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी यानि 8 नवंबर से हो रही है. इस दिन को नहाय-खाय के नाम से जाना जाता है. छठ पूजा में व्रत रखने वाले श्रद्धालु नहाय-खाय के दिन चावल,दाल व कद्दू से बने पकवान को खाएंगी. माह की पंचमी यानी 9 नवंबर को छठ का खास पूजा है जिसे खरना कहते हैं. इस दिन श्रद्वालुओं के घर में गन्ने के रस या गुड़ में बना खीर या चावल के पिट्ठे को लोग प्रसाद बोलकर चढ़ावा देते हैं और इसी प्रसाद को खाकर व्रत रखने वाली महिलाएं 36 घंटो तक लगातार निराजल व्रत रहेंगी.

कार्तिक महिने की षष्ठी यानी 10 नवंबर की शाम लगातार 36 घंटो तक व्रत रखने वाली महिलाएं नदी या तालाब में खड़े होकर डूबते सूरज को अर्घ्य देंगी. इस बार छठ पूजा का आखिरी दिन 11 नवंबर को पड़ रहा है यानी कार्तिक महिने की सप्तमी के दिन उगते सूरज को अर्घ्य देकर महिलाएं छठ पूजा, पारण के साथ यानी व्रत समाप्त करेंगी.

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