Dev Uthani Ekadashi 2021: 14 नवंबर को देवउठनी एकादशी, इस दिन भूलकर भी न खाएं चावल, जानें व्रत के नियम

Pallawi Kumari, Last updated: Fri, 12th Nov 2021, 6:50 AM IST
  •  कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहते हैं. इस बार देव उठनी एकादशी का व्रत 14 नवंबर को रखा जाएगा. कहा जता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार माह की निद्रा के बाद जागते हैं और सृष्टि का संचालन करते हैं. हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व और नियम होता है.
देव उठनी व्रत के दौरान करें इन नियमों का पालन.

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाता है. वैसे तो पूरे साल में एकादशियां आती हैं. लेकिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का काफी महत्व होता है. इसे देव उठनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि इसी दिन चार माह की निद्रा के बाद भगवान विष्णु जागते हैं. इसलिए इसे देव उठनी नाम दिया है. 

चार माह की निद्रा से जागने के बाद भगवान विष्णु सृष्टि का संचालन करते हैं. इस दिन से धार्मिक और शादी-विवाह से जुड़े सभी शुभ व मंगल कार्यों की शुरुआत हो जाती है. यही कारण है सभी सभी एकादशियों में देव उठनी एकादशी को शुभ माना गया है.

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एकादशी व्रत के दिन क्या न करें-

सिर्फ देव उठनी एकादशी ही नहीं बल्कि शास्त्रों में सभी 24 एकादशियों में चावल खाने को वर्जित माना गया है. इस दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए.

एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने के साथ ही खान-पान, व्यवहार और सात्विकता का पालन करना चाहिए. एकादशी के दिन चावल के साथ ही प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, बासी भोजन आदि का सेवन भी भूलकर भी न करें.

एकादशी के पति-पत्नी को ब्रह्नाचार्य का पालन करना चाहिए.

एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठना शुभ माना जाता है और शाम के समय नहीं सोना चाहिए.

एकादशी के दिन क्यों नहीं  खाना चाहिए चावल- मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल खाने से प्राणी रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेता है. वहीं एकादशी के दूसरे दिन द्वादशी को चावल खाने से इस योनि से मुक्ति मिलती है. पौराणिक कथा के अनुसार, माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया. चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन्न हुए, इसलिए चावल और जौ को जीव माना जाता है. जिस दिन महर्षि मेधा अंश पृथ्वी में समाया था, उस दिन एकादशी तिथि थी. इसलिए इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए.

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