New Year 2022: हर साल एक जनवरी को क्यों मनाते हैं नए साल का जश्न, जानें ये रोचक तथ्य

Anurag Gupta1, Last updated: Fri, 24th Dec 2021, 1:20 PM IST
  • साल का अंतिम महीना चल रहा है कुछ दिन में लोग नए साल का स्वागत करेंगे. भारत सहित सभी देश एक जनवरी को नया साल मनाते हैं लेकिन बहुत कम ही लोगों को नया साल एक जनवरी को मनाने के पीछे की वजह पता होगी. आइए हम बताते है एक जनवरी को नया साल मनाने की वजह.
नया साल 2022 (प्रतीकात्मक फोटो)

साल का अंतिम महीना चल रहा है कुछ दिनों के बाद ही लोग 2021 को अलविदा करके 2022 का स्वगत करेंगे. लोगों के घरों के कैलेंडर बदल जाएंगे, लोग जिंदगी के नए पन्ने पलटने में लग जाएंगे. फिर लोग 2022 की तारीख से लेकर महीने की गिनती करने लग जाएंगे. सभी देश का कल्चर अलग होने के बावजूद सभी देश एक दिन ही नया साल मनाते हैं. लोग नया साल तो खूब धूम धड़ाम से मनाते हैं लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा कि नए साल की शुरूआत कहां से हुई. नया साल एक जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है या नया साल मनाने की परंपरा कहां से शुरू हुई. चलिए आज हम नए साल मनाने के रोचक तथ्यों से आपको रूबरू कराते हैं.

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रोम से एक जनवरी को नया साल मनाने की शुरूआत हुई:

हर साल की पहली जनवरी से साल की शुरूआत होती है. हालांकि वर्षां पहले अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरीक को नए साल का जश्न मनाते थे. कोई 25 दिसंबर को मनाता था तो कोई 25 मार्च को नए साल का जश्न मनाता था. हिंदु पंचांग के अनुसार हिंदुओँ का नया साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन से शुरू होता है. लेकिन बाद में नए साल को एक जनवरी से मनाया जाने लगा. इसकी शुरुआत रोम से हुई, जहां राजा नूमा पोंपिलस ने रोमन कैलेंडर में बदलाव किया. इस कैलेंडर के आने के बाद से जनवरी के पहले दिन नया साल मनाया जाने लगा.

जनवरी नाम पड़ने की वजह:

रोम के देवता का नाम जानूस था, जिनके नाम पर महीने का नाम पड़ा. जनवरी को पहले जानूस कहा जाता था लेकिन बाद में जानूस को जनवरी कहा जाने लगा.

बाद में हुआ 12 महीने का साल:

बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि पहले साल सिर्फ 10 महीने का हुआ करता था. लेकिन बाद में साल 12 महीने के होने लगे. रोम के देवता जानूस के नाम से जनवरी पड़ा तो वहीं मार्स के नाम से मार्च पड़ा. मार्स युद्ध के देवता का नाम है. बाद में मार्स को ही मार्च कहा जाने लगा.

जूलियस सीजर से जुड़ी है 12 महीने की कहानी:

साल जब 10 महीने का हुआ करता था तब कुल 310 दिन हुआ करते थे और एक सप्ताब में 8 दिन हुआ करते थे. बाद में रोम के शासक जूलियस सीजर ने बदलाव करके साल को 12 महीने का कर दिया और 365 दिन निर्धारित कर दिया. सीजर ने खगोलविदों से जाना कि पृथ्वी 365 दिन और छह घंटे में सूर्य की परिक्रमा करती है. इसलिए सीजर ने साल के दिनों को बढ़ा दिया. वहीं साल की शुरुआत 1 जनवरी से की. उस समय से आज सभी देश एक जनवरी को नए साल जश्न मनाते हैं. हालांकि भारत भी एक जनवरी को ही मनाता है लेकिन अलग-अलग धर्म के लोग अपने पंचांग के अनुसार भी नया साल मनाते हैं.

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