आज से शुरू हो रहे होलाष्टक, जानें किन भगवान की पूजा करने से मिलेगा लाभ

Smart News Team, Last updated: Mon, 22nd Mar 2021, 7:51 AM IST
  • होली के आठ दिनों पहले 22 मार्च से शुरू होकर होलिका दहन के दिन 28 मार्च तक होलाष्टक होंगे. इन दिनों किसी भी शुभ कार्य को करना वर्जित होता है. लेकिन इन दिनों में भगवान शिव एवं कृष्ण की आराधना करना बहुत शुभ माना जाता है.
होलाष्टक के दिनों में भगवान शिव एवं कृष्ण की पूजा करने से मिलेगा लाभ

लखनऊ. आज यानी 22 मार्च से होलाष्टक शुरू हो रहे है. होली के त्योहार से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है. होलाष्टक के इन आठ दिनों में किसी भी तरह का शुभ एवं मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है. लेकिन इस अवधि में भगवान शिव एवं कृष्ण की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि फाल्गुन का महीना इन दोनों भगवानों को समर्पित होता है.

होलाष्टक फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को प्रारंभ होता है. यह आठ दिनों तक चलता है और होलिका दहन के दिन समाप्त होता है. हालांकि इस बार त्रयोदशी तिथि के क्षय होने के कारण होलाष्ठक केवल सात दिन तक की होंगे. पंडित विवेक गैरोला के अनुसार भगवान शिव एवं श्रीकृष्ण की पूजा फाल्गुन के महीने में विशेष महत्व रखती है. इन दिनों में भगवान की विधिविधान से पूजा करने पर मनोकामना पूरी होती है.

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होलाष्टक को शुभ न माने जाने के पीछे दो पौराणिक कथाएं है. जिनमें से पहली भक्त प्रहलाद एवं दूसरी कामदेव से जुड़ी हुई है. पहली कथा के अनुसार इन आठ दिनों में ही हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को श्रीहरि की भक्ति से दूर करने के लिए तमाम तरह की यातनाएं दी थी. जिसके बाद आठवें दिन हिरण्यकश्यप की वरदान प्राप्त बहन होलिका भक्त प्रहलाद को गोद में लेकर बैठ गयी. जिससे होलिका तो जल गयी लेकिन भक्त प्रहलाद बच गए.

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दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार रति के पति कामदेव ने देवताओं के कहने पर कई दिनों तक भगवान शिव की तपस्या भंग करने के विभिन्न प्रयास किए थे. जिसके बाद शिव जी ने कामदेव को फाल्गुन माह के शुक्ल अष्टमी तिथि को भस्म कर दिया. अपने पति के अपराध के लिए रति के भगवान शिव से क्षमा मांगने के बाद शिव जीने उन्हें कामदेव को पुनर्जीवन देने का आश्वासन दिया.

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