रिसर्च: महिलाएं नहीं करतीं गाड़ी चलाते वक्त फोन पर बात, एक फीसदी हासदों की शिकार

Smart News Team, Last updated: Mon, 9th Nov 2020, 8:34 AM IST
  • लखनऊ के केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर ने एक सड़क हादसों के कारणों पर एक रिसर्च की. इस रिसर्च में काफी हैरान कर देने वाले तथ्य सामने आए. 
रिसर्च: महिलाएं नहीं करतीं गाड़ी चलाते वक्त फोन पर बात, एक फीसदी हासदों की शिकार

लखनऊ: राजधानी में गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फोन पर बातें करना जिंदगी पर भारी पड़ रहा है. एक शोध के अनुसार मोबाइल पर बातें करते वक्त करीब 40 प्रतिशत तक लोग सड़क हादसे का शिकार हो रहे हैं. इसमें 99 प्रतिशत पुरुष व एक फीसदी महिलाएं चोटिल होकर अस्पताल पहुंच रही हैं.

जानकारी के मुताबिक केजीएमयू ट्रॉमा सर्जरी विभाग ने एक शोध किया. इसमें केजीएमयू ट्रॉमा सर्जरी विभाग ने अब तक 900 घायलों का ब्योरा जुटाया. इसमें 18 से 49 साल के घायलों को शामिल किया गया है. दुर्घटना का शिकार हो कर अस्पताल पहुंचे लोगों से होश में आने पर डॉक्टरों ने बात की तो उन्होंने मोबाइल पर बात करने की बात कबूल की. बता दें कि बेहोश या अति गंभीर मरीजों को शोध में शामिल नहीं किया गया है.

Dhanteras 2020: धनतेरस में खरीदारी करने के जानें शुभ मुहूर्त

इस मामले में ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ. समीर मिश्र ने बताया कि गाड़ी चलाते वक्त लोग मोबाइल पर बात करने के अलावा व्हाट्सएप का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे लोगों की संख्या लगभग 10 फीसदी है. यह भी हादसे की बड़ी वजह है. इसके साथ ही केजीएमयू के शोध में हैरान करने वाली बात सामने आई कि महिलाएं गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल पर बात करना पसंद नहीं करती हैं. वे सावधानी बरतती हैं. यही कारण है कि केवल एक प्रतिशत महिलाएं ही हादसे का शिकार हो रही हैं.

Rama Ekadashi: रमा एकादशी व्रत करने से मिलता है यह लाभ, जानें क्या है महत्व

ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ. समीर मिश्र का कहना है कि महिलाएं गाड़ी चलाने से पहले स्कूटी की डिग्गी में मोबाइल रख लेती हैं. यदि फोन आता है तो उसकी आवाज उनके कानों तक नहीं पहुंच पाती. वहीं इसके साथ ही काफी महिलाएं जीन्स व पैंट की जेब में मोबाइल रखती हैं लेकिन उन्हें भी गाड़ी चलाते समय फोन पर बात करना पसंद नहीं है. डॉ. समीर बताते हैं कि 10 से कम महिलाएं चोटिल होकर पहुंचीं. जिनमें से चार महिलाएं पैदल चलते वक्त वह गाड़ी के सामने आ जाती हैं. तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने का शौक भी जिन्दगी पर भारी पड़ रहा है. डॉ. समीर मिश्र के मुताबिक सड़के पहले से सुधरी है. हाईवे की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुई है. ऐसे में लोगों के गाड़ियों की रफ्तार भी तेज हुई है.

 

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें