300 साल पुराने चंद्रिका देवी मंदिर में वनवास के समय द्रौपदी संग यहीं आए थे पांडव

Smart News Team, Last updated: Sun, 1st Aug 2021, 11:29 PM IST
  • लखनऊ का चंद्रिका देवी मंदिर मुख्य शहर से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गोमती नदी के तट पर बना है. इस मंदिर की महिमा अपरंपार है. गांव वालों के मुताबिक अपने वनवास के दौरान पांडव भी द्रौपदी संग इस तीर्थ स्थल पर आए थे.
गांव वालों के मुताबिक अपने वनवास के दौरान पांडव भी द्रौपदी संग इस तीर्थ स्थल पर आए थे. (Credit: Lucknow Tourism Official Site)

नवाबों का शहर कहे जाने वाला लखनऊ अपनी ऐतिहासिक इमारतों और जायके लिए देशभर में प्रचलित है. यहां की इमारतें तो गौरवशाली इतिहास को बयां करती ही हैं, साथ ही यहां कई ऐसे तीर्थ स्थल भी हैं, जिनसे कुछ न कुछ खास मान्यता जरूर जुड़ी हुई है. इन्हीं में से एक तीर्थ स्थल है लखनऊ का चंद्रिका देवी मंदिर. मुख्य शहर से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गोमती नदी के तट पर बने चंद्रिका देवी मंदिर की महिमा अपरंपार है. गांव वालों के मुताबिक अपने वनवास के दौरान पांडव भी द्रौपदी संग इस तीर्थ स्थल पर आए थे.

इसी जगह पर पांडवों ने आश्वमेघ यज्ञ कर घोड़ा छोड़ा था, जिसे इस क्षेत्र के तत्कालीन राजा हंशध्वज द्वारा रोके जाने पर युद्धिष्ठिर की सेना ने उनके साथ युद्ध किया था. यहां अकसर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है और वह अपनी मनोकामना पूरी करवाने के लिए मां के दरबार में आकर मन्नत मांगते हैं और चुनरी की गांठ भी बांधते हैं. वहीं मनोकामना पूरी होने के बाद मां को चुनरी, प्रसाद चढ़ाकर मंदिर के परिसर में घंटा बांधा जाता है.

इसी जगह पर पांडवों ने आश्वमेघ यज्ञ कर घोड़ा छोड़ा था, जिसे इस क्षेत्र के तत्कालीन राजा हंशध्वज द्वारा रोके जाने पर युद्धिष्ठिर की सेना ने उनके साथ युद्ध किया था. (Credit: Lucknow Tourism Official Site)

खास बात तो यह है कि इस मंदिर में अमीर गरीब, उच्च, निम्न सभी को समान अधिकार प्राप्त है. इतना ही नहीं, मां के मंदिर में पूजा अर्चना भी पिछड़े वर्ग के मालियों द्वारा की जाती है. वहीं मंदिर के पास स्थित पछुआ देव के स्थान में पूजा अराधना अनुसूचित जाति के पासियों द्वारा की जाती है.

मंदिर के पास में ही बने महिसागर तीर्थ की भी अपनी मान्यता है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक इस तीर्थ पर भक्तों की मनोकामना तो पूरी होती ही है, साथ ही यहां लोगों के पापों का भी पूरी तरह से नाश होता है. कहा जाता है कि श्राप मुक्ति के लिए चंद्रमा को भी इसमें स्नान करने के लिए आना पड़ा था. मदिर की मान्यता और लोकप्रियता के कारण यहां हर महीने की अमावस्या पर मेला भी लगता है, जिसमें भक्तों की भी काफी भीड़ देखने को मिलती है.

 

खास बात तो यह है कि इस मंदिर में अमीर गरीब, उच्च, निम्न सभी को समान अधिकार प्राप्त है.(Credit: Lucknow Tourism Official Site)

कैसे पहुंचें: लखनऊ एयरपोर्ट से चंद्रिका देवी मंदिर की दूरी मात्र 29 किलोमीटर है, ऐसे में लोग 45 मिनट में निजी वाहन कर आसानी से यहां तक पहुंच सकते हैं. वहीं लखनऊ रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब 30 किलोमीटर है, ऐसे में पर्यटक निजी वाहन कर आसानी से मंदिर तक पहुंच सकते हैं.

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