कभी 3000 ब्रिटिश लोगों का शरण स्थल होता था लखनऊ रेसीडेंसी, आज हो चुका है खंडहर

Smart News Team, Last updated: Mon, 5th Jul 2021, 1:43 AM IST
  • लखनऊ की ब्रिटिश रेजिडेंसी, जो कभी 3000 से ज्यादा लोगों का निवास स्थान हुआ करती थी. हालांकि यह जगह पूरी तरह से खंडहर हो चुकी है, लेकिन यहां आने वालों को ब्रिटिश शासन से जुड़ी कई चीजों को जानने और सीखने का मौका मिलता है.
ब्रिटिश रेजिडेंसी का निर्माण नवाब आसफ-उद-दौला ने सन् 1775 में शुरू करवाया था और यह पूरी तरह नवाब सआदत अली खान के शासन में यानी सन 1800 ईश्वी में तैयार हुआ था. (Pic Credit: Lucknow Tourism Government Official Site)

लखनऊ शहर अपनी तहजीब और जायके के साथ-साथ अपनी इमारतों के लिए भी खूब जाना जाता है. यहां ऐसी कई इमारतें हैं जो लखनऊ के गौरवशाली इतिहास का प्रमाण देती हैं. इन्हीं इमारतों में से एक है लखनऊ की ब्रिटिश रेजिडेंसी, जो कभी 3000 से ज्यादा लोगों का निवास स्थान हुआ करती थी. हालांकि यह जगह पूरी तरह से खंडहर हो चुकी है, लेकिन यहां आने वालों को ब्रिटिश शासन से जुड़ी कई चीजों को जानने और सीखने का मौका मिलता है.

कहा जाता है कि ब्रिटिश रेजिडेंसी का निर्माण नवाब आसफ-उद-दौला ने सन् 1775 में शुरू करवाया था और यह पूरी तरह नवाब सआदत अली खान के शासन में यानी सन 1800 ईश्वी में तैयार हुआ था. गोमती नदी के तट पर बना यह भवन ब्रिटिश रेडिजेंस जनरल का निवास स्थान हुआ करता था, जो कि नवाबों के दरबार में ब्रिटिश सरकार का प्रतिनिधत्व करता था. कहा जाता है कि पूरे परिसर ने भारत की स्वतंत्रता की पहली लड़ाई में लखनऊ की प्रसिद्ध घेराबंदी में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी. बताया जाता है कि रेजिडेंसी का एक बड़ा हिस्सा अंग्रेजी सेना और भारतीय विद्रोहियों के बीच हुई लड़ाई में ही नष्ट हो गया था.

रेजिडेंसी में एक संग्रहालय भी स्थापित किया गया है, जहां 1857 की क्रांति के बारे में बताया गया है. (Pic Credit: Lucknow Tourism Government Official Site)

युद्ध के कारण जहां रेजिडेंसी की कई दीवारें टूटी हुई हैं तो वहीं दीवारों पर तोप के गोले के भी निशान हैं. रेजिडेंसी में एक चर्च और कब्रिस्तान भी बना हुआ है, जहां करीब 2000 ब्रिटिश सैनिकों, पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की कब्रें बनी हुई हैं. हर शाम को यहां के इतिहास के बारे में बताया जाता है. रेजिडेंसी में एक संग्रहालय भी स्थापित किया गया है, जहां 1857 की क्रांति के बारे में बताया गया है.

लखनऊ की ब्रिटिश रेजिडेंसी सोमवार के दिन बंद रहती है. इसमें एंट्री करने के लिए लोगों को टिकट भी लेनी पड़ती है. (Pic Credit: Lucknow Tourism Government Official Site)

बता दें कि लखनऊ की ब्रिटिश रेजिडेंसी सोमवार के दिन बंद रहती है. इसमें एंट्री करने के लिए लोगों को टिकट भी लेनी पड़ती है. जहां भारतीय नागरिकों की टिकट करीब 15 रुपये प्रति व्यक्ति है तो वहीं विदेशियों को इसमें घुसने के लिए 200 रुपये का भुगतान करना पड़ेगा.

लखनऊ रेडिजेंसी के सबसे निकट हवाईअड्डा चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, जहां से निजी टैक्सी या ऑटो करके यहां तक पहुंचा जा सकता है. वहीं निकटतम रेलवे स्टेशन चारबाग रेलवे स्टेशन है, जहां से रेजिटेंसी तक पहुंचने के लिए आसानी से टैक्सी व ऑटो मिल सकता है.

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