लंदन के बिग बेन के तर्ज पर बिना सहारे के बना है 67 मीटर ऊंचा लखनऊ का घंटाघर

Smart News Team, Last updated: Sat, 3rd Jul 2021, 9:10 PM IST
  • लखनऊ का घंटाघर, जो कि हुसैनाबाद में स्थित है. एक समय ऐसा था जब लोग घंटाघर द्वारा बताए गए समय के हिसाब से चलते थे और घड़ियाल की आवाज सुनकर सतर्क हो जाते थे और अपने कामकाज तय करते थे. घंटाघर पहुंचने के लिए हवाई मार्ग, रेल मार्ग और सड़क मार्ग तीनों का आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है.
फाइल फोटो

लखनऊ.  नवाबों का शहर कहे जाने वाला लखनऊ अपनी बोली-भाषा और तहजीब के साथ-साथ अपनी इमारतों के लिए भी खूब जाना जाता है. लखनऊ में ऐसी कई इमारतें हैं जो यहां के गौरवशाली इतिहास का प्रमाण देती हैं. इन्हीं में से एक इमारत है लखनऊ का घंटाघर, जो कि हुसैनाबाद में स्थित है. कहा जाता है कि एक समय ऐसा था जब लोग घंटाघर द्वारा बताए गए समय के हिसाब से चलते थे. वह घड़ियाल की आवाज सुनकर सतर्क हो जाते थे और अपने कामकाज को तय करते थे.

लखनऊ का यह घंटाघर लंदन के बिग बेन की तर्ज पर बनाया गया है. इसका निर्माण यहां के नवाब नसीरुद्दीन हैदर ने 1881 में करवाया था लेकिन यह पूरी तरह बनकर 1887 में तैयार हुआ. घंटाघर का इतिहास जितना रोचक है, उसका निर्माण कार्य भी उतने ही दिलचस्प तरीके से हुआ है. घंटाघर का शानदार डिजाइन रस्केल पायने ने तैयार किया था. इमामबाड़े के ठीक सामने मौजूद इस इमारत की ऊंचाई करीब 221 फीट है. कहा जाता है कि इमारत को संयुक्त प्रांत के लेफ्टिनेंट गवर्नर जॉर्ज कूपर के स्वागत में तैयार की गई थी.

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घंटाघर के निर्माण में उस वक्त भी 174 लाख रुपए का खर्च आया था. सबसे हैरान करने वाली बात तो यह है कि 67 मीटर ऊंची यह इमारत बिना किसी सहारे के तैयार की गई थी. इमारत की सुइयां बंदूक की धातु से बनाई गई हैं. कहा जाता है कि घड़ी की सुइयों को भारतीय मौसम के अनुकूल बनाया गया था. वहीं घड़ी में लगा 14 फीट लंबा और डेढ़ इंच मोटा पेंडुलम लंदन की वेस्टमिंस्टर क्लॉक की तुलना में काफी बड़ा है. जॉर्ज ताजिर को समर्पित इस घंटाघर को विजय स्तंभ के रूप में भी माना जाता है.

घंटाघर कैसे पहुंचें: घंटाघर तक पहुंचने के लिए हवाई मार्ग, रेल मार्ग और सड़क मार्ग तीनों का आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. यहां का नजदीकी हवाई अड्डा अमौसी एयरपोर्ट है, जहां से आसानी से निजी टैक्सी कर घंटाघर तक पहुंचा जा सकता है. वहीं निकटतम रेलवे स्टेशन चारबाग है, जहां से ऑटो या रिक्शा कर घंटाघर तक आया जा सकता है. इससे इतर नजदीकी बस अड्डा कैसर बाग है. घंटाघर घूमने आएं और यहां के आसपास के जायके का स्वाद न चखा जाए तो लखनऊ का सफर लगभग अधूरा ही रहता है. ऐसे में जब भी लखनऊ आएं यहां चौक बाजार पर मिलने वाले टुंडे कबाब, बॉम्बे पाव भाजी, बाजपेई की कटौड़ी, बास्केट चाट, प्रकाश की कुल्फी, मक्खन मलाई और इदरीस की बिलयानी का लुत्फ उठाना न भूलें.

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