Navratri 2021: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की होती है पूजा, पढ़ें पौराणिक कथा

Priya Gupta, Last updated: Thu, 7th Oct 2021, 9:31 AM IST
  • नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है. पहले दिन पढ़ें शैलीपुत्री की पौराणिक कथा.
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की होती है पूजा

नवरात्रि की शुरुआत 7 अक्टूबर से हो चुकी है. मां दुर्गा के नौ स्वरूप में से पहले दिन मां शैलीपुत्री की पूजा की जाती है. पहले दिन घट स्थापना के साथ नवरात्रि की शुरुआत की जाती है. मां शैलीपुत्री पर्वराज हिमालय के घर अवतरित हुईं थी. माता पार्वती और उमा के नाम से भी शैलपुत्री को जाना जाता है. वृषभ पर माता शैलपुत्री विराजमान रहती हैं. शैलपुत्री को संपूर्ण हिमालय पर्वत समर्पित हैं. नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है.

सती कथा

इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, एक बार प्रजापति दक्ष (सती के पिता) ने यज्ञ के दौरान सभी देवताओं को आमंत्रित किया. उन्होंने भगवान शिव और सती को निमंत्रण नहीं भेजा. लेकिन सती बिना निमंत्रण भी यज्ञ में जाने को तैयार थी. ऐसे में भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि बिना निमंत्रण यज्ञ में जाना ठीक नहीं. लेकिन सती नहीं मानी तो भगवान शिव ने उन्हें जाने की इजाजत दे दी.

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सती पिता के यहां बिना निमंत्रण पहुंच गई और उन्हें वहां बिना बुलाए मेहमान वाला व्यवहार ही झेलना पड़ा. उनकी माता के अलावा सती से किसी ने भी सही से बात नहीं की. इस तरह के व्यवहार और अपने पति का अपमान वे बर्दाश नहीं कर सकीं और क्रोधित हो गईं. और इसी क्षोभ, ग्लानि और क्रोध में आकर उन्होंने खुद को यज्ञ में भस्म कर दिया. जैसे ही ये समाचार भगवान शिव को मिला उन्होंने अपने गणों को दक्ष के भेजा और उनके यहां चल रहा यज्ञ विध्वंस करा दिया. अगले जन्म में उन्होंने हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया इन्हें उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है. और नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री मां की पूजा की जाती है.

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