खराब मूड को अच्छा करने का शोधकर्ताओं ने ढूंढ निकाला तरीका, करना होगा ये काम

Ruchi Sharma, Last updated: Sat, 22nd Jan 2022, 2:19 PM IST
  • अमेरिका की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी की ताजा स्टडी में रिसर्चर्स ने इससे जल्द उबरने का तरीका बताया है. इसमें उदासी से घिरे लोगों को रिसर्चर्स ने सुझाव दिया है कि वो अपनी मनोदशा को बेहतर करने के लिए एक विधि का प्रयोग करें. इसके तहत रिसर्चर्स ने उनसे उनकी बेस्ट स्किल्स यानी सर्वश्रेष्ठ कौशल का प्रयोग करने के लिए कहा.
प्रतीकात्मक तस्वीर

हमारा मन एक जैसा नहीं होता कभी-कभी हम काफी खुश हो जाते हैं तो कभी कभी हर कोई उदासी महसूस करता है. वहीं उदास मन को अच्छा करने के लिए शोधकर्ताओं ने एक बढ़िया तरीका खोज निकाला है. दरअसल अमेरिका की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी की ताजा स्टडी में रिसर्चर्स ने इससे जल्द उबरने का तरीका बताया है. इसमें उदासी से घिरे लोगों को रिसर्चर्स ने सुझाव दिया है कि वो अपनी मनोदशा को बेहतर करने के लिए एक विधि का प्रयोग करें. इसके तहत रिसर्चर्स ने उनसे उनकी बेस्ट स्किल्स यानी सर्वश्रेष्ठ कौशल का प्रयोग करने के लिए कहा.

शोधकर्ताओं का सुझाव है कि जब उदास महसूस कर रहे लोगों ने उस मूड सुधार पद्धति का उपयोग किया जिसमें उनका सबसे अच्छा कौशल या हुनर शामिल था, तो उनके मूड में तेजी से सुधार हुआ. शोधकर्ताओं ने कहा कि जिस काम में वे पारंगत हों, उदासी के समय उन्हें वो काम करना है. स्टडी के अनुसार, ऐसे प्रतिभागी उन प्रतिभागियों की तुलना में उदासी से जल्द उबर सके, जिन्हें ऐसा काम करने को कहा गया था जिसमें वो कमजोर थे. इस स्टडी के निष्कर्षों को जर्नल ऑफ क्लिनिकल साइकोलॉजी में प्रकाशित किया गया है.

काम किया तरीका

स्टडी के प्रमुख राइटर और ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में साइकोलॉजी के रिसर्चर सैमुअल मर्फी के अनुसार, हमने अपनी स्टडी के दौरान पाया कि इस विधि ने लोगों को ये सोचने में मदद की है कि वे अपनी ताकत के साथ काम कर रहे हैं. इस स्टडी के को-राइटर और ओहियो स्टेट डिप्रेशन लेबोरेट्री के प्रमुखडैनियल स्ट्रंक के अनुसार, हमारी स्टडी के नतीजे बताते हैं कि ये मायने नहीं रखता कि वे अपने उस कौशल से अच्छे थे या नहीं, जिसका प्रयोग वे उदासी के दौरान कर रहे थे. उनमें ये विश्वास था कि वे उस कौशल में अच्छे थे, जिसने इस तरीके को प्रभावी बना दिया.

ऐसे की गई स्टडी

इस स्टडी के लिए रिसर्चर्स ने 616 ग्रेजुएट छात्रों को शामिल किया. इन्हें दो तरह की थेरेपी का प्रयोग करने को कहा. एक कॉग्निटिव (संज्ञानात्मक) और माइंडफुलनेस (सचेतन). उन दोनों ही तरीकों का प्रयोग डॉक्टर डिप्रेशन आदि समस्याओं के निदान के लिए करते हैं. रिसर्चस ने प्रतिभागियों को एक काल्पनिक स्थिति दी, जिसमें उन्हें किसी मित्र द्वारा किसी सामाजिक कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किए जाने से आहत महसूस करना था. उस दौरान उन्हें उपरोक्त दोनों ही थेरेपी अपनाने को कहा गया था, साथ ही ये भी कहा गया कि वे उदासी के समय या तो सर्वश्रेष्ठ कौशल का प्रयोग करें या फिर कमजोरी का. रिसर्च में पाया कि उदासी के दौरान जिन लोगों ने अपने बेस्ट स्किल पर काम किया, वे इस मनोदशा से जल्द उबर सके.

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