कोरोनाकाल में प्रेमिकाओं तक दिल का हाल पहुंचाने को कैदियों ने अपनाया ये तरीका…

Smart News Team, Last updated: Fri, 25th Dec 2020, 7:56 PM IST
  • कोरोना की वजह से उत्तर प्रदेश की जेलों के कैदी पिछले 6 महीनों से अपनी प्रेमिकाओं से बात नहीं कर पा रहे. ऐसे में लखनऊ में कैदी जेलकर्मियों से या अपने साथियों के छूटने पर उनके हाथ चिट्ठी भिजवा रहे हैं.
कोरोनाकाल में प्रेमिकाओं तक दिल का हाल पहुंचाने को कैदियों ने अपनाया ये तरीका…

लखनऊ. कोरोनाकाल के दौरान उत्तर प्रदेश की जेलों के कैदी अपनी प्रेमिका और पत्नियों को चिट्ठी या पत्र लिख रहे हैं. दरअसल, कोरोना की वजह से हुए लॉकडाउन के कारण छह महीने से कैदी अपने घरवालों से नहीं मिल पाए हैं. हालांकि घरवालों से वो फोन पर बात कर सकते हैं लेकिन पत्नियों और प्रेमिकाओं से फोन पर भी बात नहीं कर पाते क्योंकि उनकी जेल से की गई सभी कॉल रिकॉर्ड होती हैं. ऐसे में उन्होंने दिल का हाल बताने के लिए चिट्ठी लिखनी शुरू कर दी है. ये चिट्ठियां, जेलकर्मियों या फिर जेल से छूटने वाले अपने साथियों के जरिए अपने चाहने वालों तक भिजवा रहे हैं. 

कैदियों के पत्र वर्चुअल तरीके का इस्तेमाल करते हुए व्हाट्सएप से भी पहुंचाए जा रहे हैं. इन पत्रों का जवाब भी उन कैदियों तक आ रहा है. उनकी प्रेमिकाएं या पत्नियां जेलकर्मियों के जरिए जवाब पहुंचा रही हैं. खात बात ये है कि कैदियों ने इन चिट्ठियों को पहुंचाने कि लिए पैसे भी खर्च किए हैं. अपने प्यार तक अपने दिल का हाल पहुंचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं.

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गौरतलब हो की यूपी की जेलों में एक लाख से ज्यादा कैदी बंद हैं. डीजी आनंद कुमार का कहना है कि कोरोना के चलते वो किसी से मुलाकात नहीं कर सकते लेकिन फोन के जरिए बात जरूर कर सकते है. हालांकि उन कॉल्स की रिकॉर्डिंग होगी. जेल में पढ़ने - लिखने और पत्र लिखने पर कोई रोक नहीं है. जेल के बाहर चिट्ठी को चेक करके ही भेजा जाता है. 

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जब जेल पीसीओ कैदियों की बात उनके परिवार वालों और वकील से करवाते हैं तो वो बातें रिकॉर्ड होती हैं. इस कारण कैदी प्रेमिका से बात नहीं करते. उन्हें डर लगता है कि कोई उनके खिलाफ ही साजिश कर दे. कैदियों के बाहर और अंदर भी कई दुश्मन होते हैं. जिसे उनके मन में यह डर रहता है कि कोई प्रेमिका को नुकसान ना पहुंचा दे.

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