सेक्स पावर बढ़ाने वाली वियाग्रा गोली से कोरोना का इलाज, कोमा से निकली महिला

Ruchi Sharma, Last updated: Tue, 4th Jan 2022, 11:36 AM IST
  • 37 साल की नर्स मोनिका उल्मेडा जो गंभीर कोरोना संक्रमण के चलते मौत के बिल्कुल करीब पहुंच गई थी और लंबे समय से कोमा में थी, वह वियाग्रा के इलाज के बाद अब रिकवर कर रही है. जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए नर्स ने कोविड कोमा में 28 दिन बिताए.
सेक्स पावर बढ़ाने वाली वियाग्रा गोली से कोरोना का इलाज, कोमा से निकली महिला

कोरोना वायरस का कहर एक बार फिर पूरी दुनिया में जारी है. हर दिन कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है. वहीं मौतों के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं. इसी क्रम में कोरोना वायरस के कारण एक महिला कोमा में चली गई. वह मौत के बिल्कुल करीब पहुंच गई थी. महिला को मौत के मुंह से निकालने का कोई भी जरिया नजर नहीं आ रहा था. लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि महिला को वियाग्रा के इस्तेमाल से बचा लिया गया. महिला पेशे में नर्स है. वह 37 साल की है. उसका नाम मोनिका उल्मेडा है. महिला को अनोखे तरीके से बचाने के मामले ने सबको चौंका दिया है.

बताया जा रहा है कि महिला 28 दिनों से कोविड की वजह से कोमा में चली गई थी. डॉक्टरों ने महिला को बचाने के लिए कई प्रयास किये. फिर डॉक्टरों ने उसे प्रयोग के तौर पर इलाज के दौरान वियाग्रा दिया. जिसका परिणाम चौंकाने वाला था. महिला की सेहत में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा था.

 

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वियाग्रा का हेवी डोज देकर बचाया गया जान

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोनिका को जब होश आया तो उसने डॉक्टरों और अपने सहकर्मियों का आभार व्यक्त किया. मोनिका को होश में लाने के लिए डॉक्टरों ने इरेक्टाइल डिसफंक्शन की दवा का इस्तेमाल किया. कोरोना वायरस के कारण मोनिका का ऑक्सीजन लेवल काफी कम होता जा रहा था. इस कारण डाक्टरों ने उन्हें वियाग्रा का हेवी डोज देने का निर्णय लिया. मोनिका ने बताया कि डॉक्टरों से यह बात सुनकर पहले उन्हें इस बात पर बिल्कुल भी यकीन नहीं हुआ.

एक हफ्ते में सेहत में होने लगा सुधार

डॉक्टरों के मुताबिक यह इरेक्टाइल डिसफंक्शन दवा शरीर के सभी क्षेत्रों में रक्त प्रवाह को सक्षम बनाती है. उन्होंने बताया कि इससे सिर्फ एक हफ्ते में ही उनके सेहत में सुधार होना शुरू हो गया और उनका ऑक्सीजन लेवल भी बढ़ने लगा.

अक्टूबर में हुई कोरोना पॉजिटिव

जानकारी के मुताबिक मोनिका इंग्लैंड स्थित एनएचएस लिंकनशायर में कोरोना के मरीजों का उपचार करती थीं. वैक्सीन दोनों डोज लगवाने के बाद भी अक्टूबर में मोनिका को कोविड हो गया. कोविड के चलते उनकी खांसी में खून आने लगा. अस्पताल से आने के बाद उनका ऑक्सीजन लेवल गिरने लगा और सांस न ले पाने के चलते उन्हें लिंकन काउंटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. अस्पताल में हालत बिगड़ने के बाद उन्हें 16 नवंबर को आईसीयू में ले जाया गया जहां उन्हें मेडिकल कोमा में रखा गया. मोनिका का हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि डॉक्टरों ने उनके माता-पिता को उनसे आखिरी बार मिलने के लिए पुर्तगाल से आने की सलाह दी.

अब घर पर चल रहा इलाज

आखिरी पलों में डॉक्टरों ने मोनिका को वियाग्रा की खुराक देने का फैसला लिया जिसे पहले कोविड रोगियों के इलाज के तरीके के रूप में सुझाया गया था. 14 दिसंबर को मोनिका को होश आया और क्रिसमस की पूर्व संध्या पर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया. अब मोनिका पहले से बेहतर महसूस कर रही हैं. उनका घर में ही इलाज चल रहा है.

 

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