Govats Dwadashi : जानें कब है पापों को दूर कर संतान सुख देने वाला गोवत्स द्वादशी

Smart News Team, Last updated: Sat, 7th Nov 2020, 6:15 PM IST
  • दिवाली का त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को पड़ने वाली गोवत्स द्वादशी से प्रारंभ होता है.
जानें कब है पापों को दूर कर संतान सुख देने वाला गोवत्स द्वादशी

दशहरा खत्म होने के बाद दिवाली को लेकर लोग बहुत ही बेसब्री से इंतजार करते हैं. शायद ही इस बात का जानकारी लोगों को होगी कि दिवाली केवल एक दिन का त्योहार नहीं होता है बल्कि 5 दिनों का त्योहार होता है. इसमें हर दिन कुछ नया और होता है. दिवाली का त्योहार कार्तिक अमावस्या को होता है, लेकिन इसका प्रारंभ कार्तिक द्वादशी को गोवत्स द्वादशी से होता है. दिवाली का आखिरी दिन पांचवे दिन यानी की भैया दूज का होता है.

दिवाली का पहला दिन: गोवत्स द्वादशी

दिवाली का त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को पड़ने वाली गोवत्स द्वादशी से प्रारंभ होता है. इस साल गोवत्स द्वादशी 12 नवंबर दिन गुरुवार को है. द्वादशी की शुरुआत 11 नवंबर को देर रात 12 बजकर 40 मिनट से हो रहा है, जो 12 नवंबर को रात 09 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. गोवत्स द्वादशी के दिन पूजा का मुहूर्त शाम को 05 बजकर 29 मिनट से रात 08 बजकर 07 मिनट तक है. इस दिन गोवंश की पूजा होती है.

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दिवाली का दूसरा दिन: धनतेरस

हिन्दी पंचांग के अनुसार, धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को होती है. दिवाली का दूसरा दिन धनतेरस होता है, इसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है. इस साल धनतेरस 13 नवंबर को है. त्रयोदशी तिथि का प्रारम्भ 12 नवंबर को रात 09 बजकर 30 मिनट से हो रहा है, जो 13 नवंबर को शाम 05 बजकर 59 मिनट तक है. धनतेरस पूजा का मुहूर्त शाम को 05 बजकर 28 मिनट से शाम 05 बजकर 59 मिनट तक है. इस दिन यम दीपम भी होता है. यमराज के लिए घर के बाहर एक दीपक जलाया जाता है.

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