कोरोना के बाद स्क्रब टाइफस का खतरा, शरीर के कई अंगों को करता है प्रभावित, जानें बचाव के उपाय

Priya Gupta, Last updated: Wed, 15th Sep 2021, 11:43 AM IST
  • कोरोना, डेंगू और वायरल बुखार के बीच स्क्रब टाइफस ने दस्तक दी है. इसका पहला मामला मेरठ से सामने आया था. एक महिला में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई थी.
कोरोना के बाद स्क्रब टाइफस का खतरा

मेरठ: कोरोना, डेंगू और वायरल बुखार के बीच स्क्रब टाइफस ने दस्तक दी है. इसका पहला मामला मेरठ से सामने आया था. एक महिला में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई थी. महिला में लक्षण मिलने पर गाजियाबाद में इसकी जांच कराई थी. चिंता की बात ये है बीमारी भी कोरोना की तरह है. ये ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी बैक्टीरिया के कारण होती है. लोगों में यह संक्रमित चिगर्स (लार्वा माइट्स) के काटने से फैलता है. इसे बुश टाइफस भी कहा जाता है.

इसके चलते मरीज के सेंट्रल नर्वस सिस्टम, कार्डियो वस्कुलर सिस्टम, गुर्दे, सांस से जुड़ी और गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल सिस्टम को प्रभावित हो जाता है. यहां तक की मल्टी ऑर्गन फेल्योर से मरीज की मौत भी हो सकती है. इसकी जांच की व्यवस्था मेरठ के LLRM मेडिकल कॉलेज में की गई है. लेकिन इस मामले को बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग जल्द ही स्क्रब की जांच की व्यवस्था शुरू करने जा रहा है. ताकि मरीज को जल्द उपचार मिल सके. इसके लिए मेडिकल अस्पताल में जांच किट भी आ चुकी हैं.

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स्क्रब टाइफस घुन, छोटे कीट, गिलहरी और चूहे के काटने से फैलता है. खासकर बरसात में ज्यादा बचने की जरूरत है. बरसात के मौसम में इन सभी इंसेक्ट्स से बचाव करने की सलाह दी जाती है. समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी बढ़ने का खतरा रहता है. पशुओं के मल-मूत्र में बैठने वाले कीटों, खराब भोज्य पदार्थों में लगे कीटों के कारण भी यह बीमारी फैल सकती है. इसलिए हमेशा ये कोशिश करनी चाहिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें. बाहर का खाना न खाएं. खाना बनाते समय सफाई की भी ध्यान रखे.

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