सावधान! कोरोना काल में ठंड और प्रदूषण हैं खतरे की घंटी, जानें क्यों

Smart News Team, Last updated: 23/09/2020 07:37 AM IST
  • भारत में कोरोना संक्रमण के मामले थमते हुए नहीं दिख रहे. वहीं ठंड के मौसम में इसका प्रकोप और भी बढ़ सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के दिनों में स्मॉग और फॉग दोनों की वजह से संक्रामक रोग हर साल बढ़ता है. ऐसे में, कोरोना को लेकर भी सावधानी बरतने की जरूरत है.
कोरोना के लिए ठंड और प्रदूषण खतरे की घंटी है

मेरठ. कोरोना को भारत में आए छह महीने से ज्यादा हो गए. ठंड के आखिरी में भारत में दस्तक देने वाले कोरोना ने गर्मी और बरसात में तेजी से लोगों में फैला. लेकिन अब ठंड का मौसम आने पर संभव है कोरोना का संक्रमण और भी तेजी से अपना पैर पसारे. कारण, प्रदूषण और ठंड मिलकर इसके ताकत और भी ज्यादा बढ़ा देंगे.

असल में ठंड के मौसम में कोहरा और प्रदूषक तत्व मिलकर स्मॉग बनाते है. इससे आम लोगों में भी सांस लेने की समस्या बढ़ जाती है. जैसा कि हम जानते हैं कोरोना वायरस श्वसन तंत्र पर ही सबसे ज्यादा असर करता है, ऐसे में संक्रमण बढ़ने की आशंका जाहिर है.

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इसे लेकर डॉ. वीरोत्तम तोमर कहते हैं कि ठंड के दिनों में स्मॉग और फॉग दोनों की वजह से संक्रामक रोग हर साल बढ़ता है और इस बार भी बढ़ना तय है. ऐसे में कोरोना वायरस को लेकर और भी अधिक सावधानी बरते जाने की जरूरत है. बिना मतलब घर से नहीं निकले. भीड़ भाड़ वाले इलाके से बचे और सामाजिक दूरी बनाकर रखें.

इसी प्रकार पूर्व आईएमए अध्यक्ष डॉ. तनुराज सरोही कहते हैं कि ठंड में आर्द्रता बढ़ने से कोरोना का संक्रमण सर्दियों में बढ़ने की आशंका है. वैसे अभी तो डेढ़ माह डेंगू, मलेरिया का भी खतरा रहता है. उसके बाद सर्दियों में तो दिक्कत आएगी ही. सांस की तकलीफ लोगों को बढ़ेगी. ऐसे में सामाजिक दूरी बनाना जरूरी है.

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बचाव के लिए चिकित्सकों का कहना है कि किसी भी हाल में गर्म पानी और आयुर्वेदिक काढ़ा ना छोड़ें. ठंड के दिनों में यह काफी महत्वपूर्ण साबित होगा. गर्म पेय पदार्थ कोरोना से बचाव में काफी मददगार साबित होगा.

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