पटरी नव-निर्माण में पेड़ों को काटने का हो रहा है विरोध, होगा चिपको आंदोलन

Smart News Team, Last updated: Fri, 6th Aug 2021, 10:12 AM IST
  • गंगनहर पटरी के नव-निर्माण में काटे जा रहे पेड़ों को बचाने के लिए अब कई सामाजिक संगठन आगे आए हैं. बता दें, गंगनहर पटरी को दोबारा से निर्मित किया जा रहा है, जिसको लेकर दांयी तरफ के पेड़ों को काटा जाएगा.
गंगनहर पटरी को दोबारा से निर्मित किया जा रहा है, जिसको लेकर दांयी तरफ के पेड़ों को काटा जाएगा

मेरठ. गंगनहर पटरी के नव-निर्माण में काटे जा रहे पेड़ों को बचाने के लिए अब कई सामाजिक संगठन आगे आए हैं. बता दें, गंगनहर पटरी को दोबारा से निर्मित किया जा रहा है, जिसको लेकर दांयी तरफ के पेड़ों को काटा जाएगा. अब इसको लेकर सेव इंडिया जन फाउंडेशन व नागरिक जागरूक एसोसिएशन ने पेड़ों के काटने का विरोध करते हुए जिलाधिकारी व सिंचाई विभाग के आला अफसरों से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा. सेव इंडिया जन फाउंडेशन के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि लोक निर्माण विभाग ने गंग नहर की दांयी पटरी पर सड़क बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था. जिसे स्वीकृति मिल गई है.

राजेश शर्मा ने बताया कि मुरादनगर से लेकर उत्तराखंड बॉर्डर तक करीब 118 किलोमीटर तक खड़े लगभग 55000 से ज्यादा पेड़ काटकर पटरी का दोहरीकरण होगा. राजेश शर्मा ने विरोध करते हुए कहा कि हमारी मांग है कि गंगनहर की दायीं पटरी पर जो सड़क बनानी है, उसे लोक निर्माण विभाग नहर की पटरी पर लगभग 40 मीटर वन विभाग की भूमि को छोड़कर बाकी बची जमीन पर किसानों के खेत से मिलाकर पटरी को बनाया जा सकता है.राजेश शर्मा ने बताया कि ऐसा करने से एक तो किसानों को लाभ होगा दूसरे गंगनहर का वन क्षेत्र सुरक्षित रहेगा. क्योंकि गंगनहर उत्तर प्रदेश उत्तरांचल के लिए जीवनदायिनी है. विश्व की ऐसी एकमात्र गंगनहर है, जो आसपास के क्षेत्र में पानी रिचार्ज करती है. रिचार्ज करने की वजह पटरी के दोनों ओर खड़े घने पेड़ हैं. यदि यह पेड़ काटे गए तो यह नहर प्रदूषित हो जाएगी जिस वजह से निकट भविष्य में पानी रिचार्ज नहीं करेगी.

उन्होंने कहा कि पेड़ों के कटान और गंगनहर को संरक्षित करने के लिए अब गांव गांव आंदोलन शुरू हो गया है. सेव इंडिया फाउंडेशन के चिपको आंदोलन से पेड़ों के संरक्षण व गंगनहर को प्रदूषित होने से बचाएगा. 2 जनवरी से चिपको आंदोलन की शुरुआत हो गई है. उन्होंने कहा कि 118 किलोमीटर तक सेव इंडिया जन फाउंडेशन ग्रामीणों के साथ मिलकर छोटे और बड़े पेड़ों का सर्वे स्वयं करेगा.

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