मेरठ: बजट के बीच पेपर मिलों पर गहराया अपना वजूद बचाने का संकट, की ये मांग

Smart News Team, Last updated: 01/02/2021 06:54 PM IST
  • देश की संसद में 2021 की बजट पेश किया जा रहा है. बजट में एक तरफ जहां हर क्षेत्र के लोग अपना-अपना फायदा देख रहे हैं. वहीं, बजट में कुछ पाने से ज्यादा पेपरमिलों की मांग अपना वजूद बचाने पर है.
बजट पेश करती केंद्रीय वित्त मंत्री, निर्मला सीतारमण

मेरठ: देश की संसद में 2021 की बजट पेश किया जा रहा है. बजट में एक तरफ जहां हर क्षेत्र के लोग अपना-अपना फायदा देख रहे हैं. वहीं, बजट में कुछ पाने से ज्यादा पेपरमिलों की मांग अपना वजूद बचाने पर है. एनसीआर क्षेत्र की पेपरमिलों को पीएनजी में बदलने का फरमान दोबारा जारी होने के बाद इंडस्ट्री बड़े संकट में फंसती नजर आ रही है. इसको लेकर उद्यमियों ने कहा है कि पीएनजी ईंधन अपनाने के लिए हर इंडस्ट्री पर 50 करोड़ से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा, जिसे सहन करने की क्षमता उनमें नहीं है.

बता दें, वित्त मंत्रालय ने कोरोनाकाल के बाद औद्योगिक सैक्टर को ताकत बजट में कई बड़े फैसले लिए हैं. हालांकि, इन सबके बीच वहीं पेपरमिल इंडस्ट्री वजूद की लड़ाई लड़ रही है. उनकी मांग है कि पीएनजी में बदलने वाला फरमान तीन साल के लिए टाला जाए या फिर सरकार उद्योगों को भारी भरकम सब्सिडी दे. एनसीआर में करीब 70 पेपरमिलें हैं, जिसमें रोजाना करीब 20 हजार टन पेपर का उत्पादन हो रहा है. इसका निर्यात चीन, मलेशिया, यूरोप व अफ्रीकी देशों तक किया जा रहा है.

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बजट को लेकर संगल पेपरमिल के निदेशक हिमांशु संगल का कहना है कि सरकार को स्कूलों को खोल देना चाहिए, इससे पेपर इंडस्ट्री की सेहत अच्छी होगी. यहां वेस्ट पेपर मिलने की बड़ी समस्या है, जिसका समाधान करना होगा.

 

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