मेरठ: मांग पूरी नहीं हुई तो शिक्षक बीएसए कार्यालय पर देंगे धरना

Smart News Team, Last updated: 11/08/2020 11:56 PM IST
  • राष्ट्रीय सचिव महासंघ के आह्वान पर शिक्षकों ने ऑनलाइन बैठक आयोजित की प्रधानाध्यापक के पद से पदानवत कर सहायक अध्यापक बनाये जाने और विभाग ने वेतन में कई कमी औसतन 4 से 10000 रुपये वेतन प्रतिमाह शिक्षकों को कम दिया जा रहा कोर्ट ने कहा बढ़े हुए वेतन को कम नहीं कर सकता विभाग
सांकेतिक तस्वीर

मेरठ। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर मंगलवार को शिक्षकों की एक आनलाइन बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में शिक्षकों ने अपनी मांग को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया.

बैठक में जनपद मेरठ के पदानवत होकर आए बड़ी संख्या में शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ मेरठ के जिला महामंत्री डॉ छोटू राम ने बताया कि विगत वर्षों में शासन द्वारा अंतर्जनपदीय स्थानांतरण की प्रक्रिया में करीब 300 से 400 शिक्षक मेरठ जनपद में ऐसे आए हैं, जिन्हें जूनियर हाई स्कूल के सहायक अध्यापक प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक के पद से पदानवत करके प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक बना दिया. इनका पद कम करने के साथ साथ वेतन भी कम कर दिया गया. इन शिक्षकों का ग्रेड पे 4600 स्थान पर 4200 कर दिया गया.

इसके अलावा 2 वर्ष की वार्षिक वेतन वृद्धि भी शिक्षकों के वेतन से कम कर दी गई, जिससे जनपद मेरठ के ऐसे सैकड़ों शिक्षकों को प्रतिमाह 4000 से 10000 रुपए तक का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है. इसके खिलाफ जनपद मेरठ के सैकड़ों शिक्षक माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की शरण में गए.

माननीय उच्च न्यायालय ने शिक्षकों के हित में बेसिक शिक्षा अधिकारी, मेरठ को आदेश दिया कि बढ़ा हुआ वेतन कम नहीं किया जा सकता. अतः शिक्षकों को उनके अंतिम वेतन प्रमाण पत्र के आधार पर वेतन दिया जाए. माननीय उच्च न्यायालय के उस आदेश को जारी किए हुए करीब 2 साल हो चुके किन्तु आज तक भी सैकड़ों शिक्षकों को पूर्ण वेतन का अधिकार नहीं दिया गया.

बैठक में सैकड़ों शिक्षकों ने वित्त लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा मेरठ को अंतिम चेतावनी देते हुए पूर्ण वेतन की मांग की. शिक्षकों ने कहा कि अगर वह उच्च न्यायालय का आदेश नहीं मानते तो सभी शिक्षक वित्त एवं लेखाधिकारी का घेराव कर धरना देंगे. सत्याग्रह करेंगे और जब तक नहीं उठेंगे जब तक उनकी यह न्यायिक मांग पूरी नहीं होती. इसके लिए लिए स्वयं वित्त लेखाधिकारी जिम्मेदार होंगे.

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