RLD बीजेपी को क्यों पसंद, पश्चिमी यूपी में चुनाव से पहले ही "चौधरी" बन गए हैं जयंत !

Ankul Kaushik, Last updated: Mon, 31st Jan 2022, 9:44 AM IST
  • यूपी चुनाव में रालोद और सपा एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं. हालांकि साल 2017 में एक सीट पर जीत दर्ज करने वाली रालोद को बीजेपी भी पसंद करती है. वहीं पश्चिमी यूपी में जाट वोट बैंक को देखते हुए चुनाव से पहले ही चौधरी बन गए हैं जयंत. 
रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी (फाइल फोटो)

मेरठ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) और जंयत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का गठबंधन हैं. इस चुनाव के लिए पश्चिमी यूपी को साधने की लिए यूपी की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी हर तरह से लगी हुई है. आए दिन बीजेपी के बड़े नेता वर्चुअल रैली और डोर टू डोर कैंपेन कर रहे हैं. माना जा रहा है कि साल 2017 में महज एक सीट पर जीत दर्ज करने वाली जंयत चौधरी की रालोद इस चुनाव में काफी उभर कर आई है. इतना ही नहीं पश्चिमी यूपी में माना जा रहा है कि चुनाव से पहले ही चौधरी बन गए हैं जयंत. वहीं बीजेपी पर कई बार जयंत हमलावर हुए हैं फिर भी बीजेपी ने जयंत को पार्टी में आने का न्यौता दे दिया हैं. वहीं बीजेपी के इस न्यौते पर जंयत ने सख्त होते हुए कहा कि वह कोई चवन्नी नहीं हैं जो पलट जाएं.

माना जा रहा है कि यूपी चुनाव में जो रालोद की वापसी हो रही है वह किसी पार्टी की नहीं हो रही है. क्योंकि हाल ही में कई नेताओं ने कांग्रेस, बीजेपी छोड़ रालोद का हाथ थामा हैं. वहीं अखिलेश ने भी जयंत को उनके हिसाब से ही गठबंधन के तहत टिकट दे दी हैं. अब देखना ये है कि यूपी चुनाव में जयंत चौधरी अपनी विरासत पर वापस ले पाएंगे या नहीं. माना जा रहा है कि किसान आंदोलन का भी जयंत चौधरी को काफी फायदा मिला है.

बीजेपी के गठबंधन के न्योते पर बोले जयंत चौधरी- मैं कोई चवन्नी नहीं जो पलट जाऊं

किसानों के मसीहा के नाम से जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को लेकर आज भी किसानों के दिल में प्यार है. इसका कारण यही है कि जयंत को पश्चिमी यूपी की जनता प्यार कर रही है. हालांकि कुछ सीटों पर जयंत से टिकट बंटवारे को लेकर नाराजगी भी है. बता दें कि साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को महज एक सीट पर जीत मिली थी. यह सीट बागपत जिले की छपरौली थी जिस पर रालोद के प्रत्याशी सहेंद्र सिंह ने बीजेपी को हराया था. हालांकि साल 2018 में पार्टी ने इन्हें निकाल दिया था.

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