12 दिसंबर को मेरठ में होगी जाट महापंचायत, दहेज प्रथा व मृत्युभोज जैसी परंपराओं पर लग सकती है रोक

Haimendra Singh, Last updated: Sat, 11th Dec 2021, 2:09 PM IST
  • यूपी जाट महासभा 12 दिसंबर दिन रविवार को मेरठ में जाट महापंचायत का आयोजन कर रहा है. इस महापंचायत में जाट समुदाय मृत्युभोज, शादियों में अतिरिक्त खर्चा और दहेजप्रथा जैसी परंपराओं पर रोक लगा सकती है. 
रविवार को मेरठ में होगी जाट महापंचायत.( सांकेतिक फोटो )

मेरठ. उत्तर प्रदेश के मेरठ में रविवार यानी 12 दिसंबर को ‘जाट महापंचायत’ होने जा रही है. विधानसभा चुनाव 2022 से पहले हो रही महापंचायत को काफी अहम माना जा रहा है. इसमें जाट समुदाय कुछ परंपराओं जैसे- मृत्युभोज, शादियों में ज्यादा खर्चा और दहेजप्रथा आदि पर रोक का ऐलान कर सकता है. महापंचायत को अखिल भारतीय उत्तर प्रदेश जाट महासभा आयोजित कर रही है. इसमें महासभा के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र चौधरी सहित यूपी के प्रमुख पदाधिकारी और हजारों लोगों हिस्सा लेंगे. साथ ही महापंचायत का यह भी प्रयास रहेगा कि समाज के युवा नशे, गुटका, मांस, शराब से दूर रहकर शिक्षा की तरफ ध्यान दें.

मिली जानकारी के अनुसार, अखिल उत्तर प्रदेश जाट महासभा जुड़े पदधिकारियों का कहना है कि जाट समाज में परिवारों के आपसी संपत्ति विवाद, पारिवारिक विवादों को कोर्ट कचहरी के बजाय घर और समाज की पंचायतों में सुलझाया का पूरा प्रयास किया जाएगा. इसके अलावा युवा पीढी को सिखाया जाएगा. कि माता, पिता, बुजुर्गों, नारी का सम्मान करें, समाज के युवाओं की शिक्षा के लिए निशुल्क कोचिंगों की व्यवस्था की जाए.

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दहेज प्रथा रोकने का ऐलान

महापंचायत में जाट समुदाय ये भी संकल्प ले सकता है कि शादियों में न दहेज लेंगे, न देंगे. इसके अलावा कन्या भ्रूण हत्या को रोककर बेटी बचाओ पर काम करें ताकि जाट समाज में बेटियों की घटती संख्या को ठीक कर लिंगानुपात सुधारा जा सके और महंगी शादियों को खत्म करके सामान्य विवाह पर विचार किया जाएगा, जिससे किसी भी बेटी के पिता पर उसकी शादी का बोझ न पड़े.

आरक्षण हमारा हक है

जाट आरक्षण पर महासभा से जुड़े लोगों को कहना है कि जाट आरक्षण हमारा है और हम उसे लेकर ही रहेंगे. जाट महासभा के संरक्षक रिटायर मेजर जनरल एसएस अहलावत ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जाटों को आरक्षण मिला है, लेकिन अभी बाकी राज्यों में हमे आरक्षण नहीं मिला है. हमने जाट आरक्षण के मुद्दा लंबे समय से उठाया है लेकिन सरकार सुनवाई नहीं कर रही. अब हमे चुनाव से पहले आंदोलन को तेज करना होगा.

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