मेरठ में राजस्नेह ग्रुप पर सीबीआई का छापा, नौ घंटे में खंगाला 78 करोड़ का रिकार्ड

Nawab Ali, Last updated: Sat, 4th Sep 2021, 11:38 PM IST
  • फर्जी तरीके लोन लेने के मामले में सीबीआइ ने मेरठ के राजस्नेह ग्रुप पर छापेमारी की है. सीबीआई ने छापेमारी कर राजस्नेह ग्रुप के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं. 9 घंटे चली कार्रवाई में सीबीआई ने राजस्नेह ग्रुप के डायरेक्टर समेत परिवार के कई लोगों से पूछताछ की है.
फाइल फोटो.

मेरठ. फर्जी तरीके से लों लेने के मामले में सीबीआई ने शुक्रवार को मेरठ के राजस्नेह ग्रुप के चार अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की है. सीबीआई की छापेमारी लगभग नौ घंटे चली जिसमें राजस्नेह ग्रुप के 78 करोड़ का रिकार्ड खंगाला गया. सीबीआई ने छापेमारी के दौरान ग्रुप के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं. फर्जी तरीके से लोन लेने के मामले में सीबीआई ने बैंक अफसरों से भी पूछताछ की है. गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट से सर्च वारंट मिलने के बाद सीबीआई ने कार्रवाई को अंजाम दिया है.

सीबीआई टीम सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराएगी और उसके बाद टीम लोन स्वीकृति और संपत्ति के ब्योरे की जानकारी भी जुटाएगी. सीबीआई की जांच में बैंक के कई अधिकारीयों पर की मिलीभगत का खुलासा हो सकता है. संपत्ति के लिहाज से देखे तो लोन की रकम काफी ज्यादा है. लेकिन राजस्नेह के निदेशक अशोक जैन और डायरेक्टर मनोज गुप्ता की माने तो प्रॉपर्टी की कीमत लोन की कीमत से काफी ज्यादा है इसीलिए बैंक ने सीबीआई का सहारा लिया है.

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ट्रू वैल्यू को छोड़ सभी शोरूम में लग गए ताले

अशोक जैन और मनोज गुप्ता का काम तीन साल पहले तक सब अच्छा चल रहा था. उनकी मोहकमपुर दिल्ली रोड स्थित राज स्नेह के नाम से मारुति की गाड़ियों का शोरूम और वर्कशाप थी. गाड़ियों का स्टॉक यार्ड सूर्या पैलेस में बनाया था. इसके अलावा दोनों के पास नेक्सा और एरेना के शोरूम व वर्कशॉप, गढ़ रोड पर शोरूम और रुड़की रोड पर राजमंदिर मंडप के पास एक वर्कशाप के साथ सीसीएसयू के सामने एरेना शोरूम खोला था. इन सबके साथ ही नेक्सा का एक शोरूम दिल्ली रोड पर और रिठानी में वर्कशॉप थी. अशोक जैन और मनोज गुप्ता के कर्ज में डूबने के कारण ट्रूवैल्यू को छोड़ कई शोरूम और वर्कशॉप में ताला लग गया.

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अशोक जैन का कहना है उनकी तीन फर्म पर 65 करोड़ का कर्ज है. जिसके चलते सीबीआई पूछताछ करने आई थी जिसका हमने पूरा सहयोग किया. वहीं निदेशक अनिल जैन का कहना है कि उनका राजस्नेह से कोई लेना देना नहीं था. उस समय भी वे बतौर कर्मचारी काम करते थे. डायरेक्टर पद से हटाने की सूचना आरओसी की साइट्स पर भी है. तीसरे डायरेक्टर मनोज गुप्ता को संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका फोन स्वीच ऑफ होने कारण उनसे संपर्क नहीं हो पाया है.

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ऐसे किया कंपनियों ने लोन फर्जीवाड़ा

कंपनियां बैंक के अफसरों व बैंककर्मिर्यों के साथ साठगांठ करके कम दाम की चीज को ज्यादा दिखाती है और ज्यादा से ज्यादा लोन लेती थी. बिजनेस में घाटा दिखाकर खुद को दिवालिया दिखाया जा रहा था. व्यापार में नुकसान होने के बाद कंपनी को छोड़ दिया जाता है. बैंक पहले से ही कम चीज का ज्यादा दाम दिया रहता है जिसके चलते फर्म को बेचकर भी बैंक लोन की रकम पूरी नहीं कर पाता. बैंक अफसरों का कहना है कि राजस्नेह ने तीन फर्म को कीमत से अधिक दिखाकर लोन लिया था. जिसके बाद उनकी संपत्ति बेचकर भी बैंक अपनी रकम नहीं जुटा पा रहा है.

 

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