UP में प्राइवेट बीएड-बीटीसी कॉलेजों की होगी जांच, सैंकड़ों पर लटक सकते हैं ताले

Smart News Team, Last updated: 11/10/2020 07:32 AM IST
  • यूपी के प्राइवेट बीएड और बीटीसी कॉलेजों पर जल्द ही गाज गिर सकती है. इसके लिए मंडल स्तर पर टीमें बनाकर जांच के निर्देश दिए गए हैं. जांच रिपोर्ट सात दिन के अन्दर देना जरुरी होगा.
प्रतीकात्मक तस्वीर

मेरठ: प्रदेश में भर में सालों से विवादित और मानकों के उल्लंघन के सवालों के घेरे में रहे बीएड कॉलेजों पर आखिरकार सरकार ने जांच बैठा दी है. शासन ने प्रदेश के समस्त बीएड एवं बीटीसी कॉलेजों में विभिन्न बिंदुओं पर जांच के आदेश जारी कर दिए हैं. इससे शहर के चौ. चरण सिंह विवि से संबद्ध नौ जिलों के 440 बीएड कॉलेज और 50 से अधिक बीटीसी कॉलेज जांच के घेरे में होंगे. 

जानकारी के मुताबिक पहले चरण में प्रदेश के 18 जिलों में कॉलेजों की जांच को समिति बनी है. मेरठ, मुजफ्फरनगर, मथुरा, मुरादाबाद, एटा और बरेली की जांच समाज कल्याण के सहायत निदेशक सिद्धार्थ मिश्र करेंगे. लखनऊ, कानपुर नगर, अंबेडकर नगर, बस्ती, गोंडा, संतकबीर नगर जिलों की जांच अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की निदेशक इन्दुमति जबकि प्रयागराज, गाजीपुर, मिर्जापुर, झांसी, बांदा एवं औरेया की जांच पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के उप निदेशक अजीत प्रताप सिंह करेंगे. ये सभी अपनी समिति के अध्यक्ष होंगे. जिलों में जांच के लिए ऑडिटर एवं अन्य स्टॉफ ले जा सकेंगे. प्रत्येक जिले में एडीएम भी नियुक्त होंगे. इसके साथ ही सात दिन में रिपोर्ट देना जरुरी होगा .

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माना जा रहा है कि प्रदेश में ऐसे कालेजों की भरमार है, जो मानक को ताक पर रखकर काम करते हैं. कई कॉलेजों में स्टॉफ की नियुक्ति केवल कागजों पर है. मानकों के अनुसार सेलरी नहीं दी जाती. एक ही कैंपस में बीएड, बीटीसी, ट्रेडिशनल कोर्स और फॉर्मेसी जैसे कॉलेज चलाए जा रहे हैं. मानकों के अनुसार प्राप्त फीस सेलरी और संसाधनों पर खर्च नहीं की जा रही.  ऐसे में जांच के बाद ऐसे सैकड़ों बीएड-बीटीसी कॉलेजों पर ताले लटकने की संभावना स्पष्ट दिखाई दे रही है.

जांच में कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं को आधार बनाया गया है-

1- सत्र 19-20 एवं 20-21 में बीएड-बीटीसी कोर्स में प्रवेश के लिए हुए एंट्रेंस में नियत नीति, छात्रों के प्रवेश हेतु न्यूनतम कटऑफ, सीटों के सापेक्ष एससी-एसटी छात्रों के आरक्षण नियमों के अनुसार प्रवेश.

2- कॉलेजों की मान्यता, कोर्स की संबद्धता, स्वीकृत सीट और निर्धारित शुल्क का परीक्षण.

3- कोर्स में नियुक्त शिक्षकों की न्यूनतम अर्हता, सत्यापन में कार्यरत शिक्षकों की शैक्षिक अर्हता की जांच.

4- कॉलेजों में टीचिंग के लिए कक्ष और आधारभूत ढांचे की स्थिति.

5- जिस भूमि पर कॉलेज चल रहा है उस भूमि पर अन्य प्रकार के संस्थानों का सत्यापान.

 

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