मेरठ में बने बीडीएम बल्ले से पारी की शुरुआत करते थे चेतन चौहान

Smart News Team, Last updated: 17/08/2020 08:10 AM IST
  • मेरठ के लोगों के दिलों में हमेशा राज़ करते रहेंगे चेतन चौहान भामाशाह क्रिकेट पार्क और क्रीड़ा भारती के कार्यक्रमों में नियमित रूप से पहुंचते थे मेरठ संन्यास के बाद चेतन की एक्सपोर्ट कंपनी के लिए मेरठ से बनाए गए बल्ले का होता था आस्ट्रेलिया में निर्यात
चेतन चौहान 

मेरठ। क्रिकेट की पिच पर तूफानी गेंदबाजों के पसीने छुड़ाने वाले पूर्व ओपनर बल्लेबाज चेतन चौहान जिंदगी की जंग हार गए. एक शानदार क्रिकेटर के तौर पर मेरठ चेतन चौहान के लिए दूसरा घर था. अपनी सियासी पारी खेलते हुए कैबिनेट मंत्री बनने के सफर में भी इस शहर का बड़ा योगदान रहा.

भामाशाह क्रिकेट पार्क में नई प्रतिभाओं को परखने के लिए आते थे. इस दौरान नई प्रतिभाओं को वह बैटिंग टिप्स भी दिया करते थे. क्रीड़ा भारती के कार्यक्रमों में जोश व जज्बा भरने के लिए भी वह नियमित रूप से मेरठ पहुंचते थे.

चेतन चौहान 70 के दशक में महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर के साथ ओपनिंग करते थे. उन्होंने मेरठ के बीडीएम कंपनी के बल्ले से क्रिकेट खेला.

राकेश महाजन ने बताया कि गावस्कर उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ साथी मानते थे. उन्होंने 70 और 80 के दशक के महान गेंदबाजों का सामना करते हुए ठोस पारियां खेलीं. राकेश ने मई 2018 में सूरजकुंड पर अपनी क्रिकेट एकेडमी खोली, जहां चेतन चौहान ने पहुंचकर कई खिलाडिय़ों को सम्मानित भी किया था.

क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद चेतन ने एक एक्सपोर्ट कंपनी खोला था, जिसके जरिए आस्ट्रेलिया में बल्ला निर्यात किया जाता था. इसके लिए बल्ले मेरठ में बनाये जाते थे. वह भामाशाह क्रिकेट पार्क में क्रिकेटरों के कैंप में भी पहुंचते थे. कैलाश प्रकाश स्टेडियम से लेकर क्रीड़ा भारती के कार्यक्रमों में पहुंचकर खिलाडिय़ों का उत्साहवर्धन करते थे.

यूपीसीए के चेयरमैन युद्धवीर सिंह ने कहा कि खेलों के प्रति वह हमेशा निष्ठावान रहे हैं. उन्होंने सदैव सभी खेलों का सम्मान किया है. साथ ही खिलाड़ियों में हमेशा जोश और जज्बा भरते रहे हैं.

वह एक नेक दिल इंसान थे. उनका इस दुनिया को छोड़ कर चले जाना क्रिकेट के लिए अपूरणीय क्षति है. इस दौरान प्रदेश कार्यसमिति की बैठक से लेकर क्षेत्रीय इकाई की बैठकों में शामिल होने के लिए मेरठ आते-जाते रहे. माधवकुंज और शंकर आश्रम के भी नियमित संपर्क में थे.

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