RRTS ट्रेन का फर्स्ट लुक जारी, दिल्ली से मेरठ जाने में लगेगा 1 घंटे से भी कम समय

Smart News Team, Last updated: Sat, 26th Sep 2020, 9:29 PM IST
  • मेरठ.180 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड वाली ट्रेन पहली आधुनिक प्रणाली वाली है. ट्रेन रोकने के दौरान लगभग 30% ऊर्जा रीजेनरेट होगी. गुजरात स्थित सांवली प्लांट में ट्रेन सेट का होगा मेक इन इंडिया में निर्माण.
प्रतीकात्मक तस्वीर 

मेरठ। दिल्ली से मेरठ के बीच की दूरी अब कम होती हुई दिखाई दे रही है.आने वाले दो से तीन साल के बीच में 60 मिनट से भी कम में ये सफर पूरा किया जा सकेगा. हाई स्पीड रैपिड रेल (RRTS Train) के पहले लुक के अनावरण पर केंद्रीय आवास एवं शहरी मामला मंत्रालय के सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने इस बात से अवगत कराया है. मिश्र ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत संकल्प के तहत हाई स्पीड रेल का निर्माण पूरी तरह से मेक इन इंडिया योजना पर आधारित है.

इस दौरान एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह ने कहा कि भारत के प्रथम आरआरटीएस ट्रेन सेट का न्यू इंडिया की आकांक्षाओं को पूरा करने के विजन के साथ डिजाइन किया गया है. मजेदार बात यह है कि इस ट्रेन को दूर से देखने पर दिल्ली के प्रसिद्ध लोटस टेंपल मंदिर की खूबसूरत झलक दिखाई देगी, क्योंकि इसकी बनावट इस प्रकार से की गई है.

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आपको बतादे के 82 किलोमीटर लंबा दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर भारत में लागू होने वाला पहला आरआरटीएस कॉरिडोर है. वर्तमान में सड़क मार्ग से दिल्ली से मेरठ तक का आवागमन समय 3 से 4 घंटे लगता है.आरटीएस की मदद से यह दूरी 60 मिनट से भी कम समय में तय की जा सकेगी.

वही साहिबाबाद से शताब्दी नगर (मेरठ) के बीच लगभग 50 किलोमीटर लंबे खंड पर सिविल निर्माण कार्य पूरे जोरों से जारी है, गाजियाबाद साहिबाबाद गिरधर और दुहाई में बनाए जाएंगे स्टेशन डिपो. साहिबाबाद से दुहाई के बीच के 17 किलोमीटर लंबे प्राथमिक खंड पर परिचालन 2023 से प्रस्तावित है जबकि पूरे कॉरिडोर को 2025 में जनता के लिए खोलने का लक्ष्य है.

ट्रेन की खासियत ये की यह 180 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड वाली ट्रेन पहली आधुनिक प्रणाली वाली है. ट्रेन रोकने के दौरान लगभग 30% ऊर्जा रीजेनरेट होगी.गुजरात स्थित सांवली प्लांट में ट्रेन सेट का होगा मेक इन इंडिया में निर्माण.आरआरटीएस ट्रेन का डिजाइन दिल्ली के प्रसिद्ध लोटस टेंपल से प्रेरित है.स्टील से बने ये ट्रेनें पूरी तरह से वातानुकूलित होंगी.

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कोच में प्रवेश और निकास के लिए 6 स्वचालित दरवाजे होंगे साथ इस ट्रेन में बिजनेस क्लास कोच में ऐसे 4 दरवाजे होंगे. जिन्हें बाहर के मनोरम दृश्य के लिए डबल ग्लेज्ड टैंपर प्रूफ शीशे की खिड़कियां होंगी. जिसमे दिव्यांग जनों के लिए ट्रेन के दरवाजों के पास व्हीलचेयर के लिए जगह होगी और पुश बटन के जरिए खुल सकेंगे ट्रेन के दरवाजे. प्रत्येक प्लेटफार्म पर स्क्रीन दरवाजे होंगे. यह दरवाजे ट्रेन के दरवाजों के साथ ही खुलेंगे और बंद होंगे.

 

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