Karwa Chauth 2021: करवा चौथ पर पूजा के दौरान पढ़ें ये पौराणिक कथा, पूजा विधी, शुभ मुहूर्त

Priya Gupta, Last updated: Sun, 3rd Oct 2021, 3:02 PM IST
  • इस साल करवा चौथ 24 अक्टूबर 2021 को है. पूरा दिन निर्जला व्रत करने के बाद शाम को पूजा और कथा पढ़कर या सुनकर चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं.
करवा चौथ पर पूजा के दौरान पढ़ें ये पौराणिक कथा

करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखतीं हैं, लंबी आयु और स्वास्थ्य की कामना के लिए कथा करती हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस साल करवा चौथ 24 अक्टूबर 2021 को है. पूरा दिन निर्जला व्रत करने के बाद शाम को पूजा और कथा पढ़कर या सुनकर चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं.

करवा चौथ पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय एक साहूकार के सात बेटे और एक पुत्री थी जिसका नाम वीरावती था. सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे. यहां तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। जब वीरावती का विवाह हुआ तो ,उस समय अपनी ससुराल से मायके आई हुई थी. अपनी सभी भाभियों के साथ वीरावती ने भी करवा चौथ का व्रत रखा. पूरे दिन निर्जल उपवास के कारण वीरावती अत्यधिक व्याकुल हो गई. सभी को भाईयों उनकी बहन की व्याकुल देखी नहीं गई. सभी भाई जब खाना खाने बैठे तो अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने कहा कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्य देकर ही खा सकती है. चूंकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भोजन या जल ग्रहण नहीं कर सकती.

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सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती है और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है. दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चांद उदित हो रहा हो. इसके बाद भाई अपनी बहन को कहता है कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो. बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखती है, उसे अर्घ्य देकर खाना खाने बैठ जाती है.

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