मथुरा को जन्माष्टमी के मौके पर सजाया गया दुल्हन की तरह

Anuradha Raj, Last updated: Sun, 29th Aug 2021, 7:02 PM IST
  • 30 अगस्त को जन्माष्टमी का त्योहार है, ऐसे में देश और दुनियाभर में जन्माष्टमी का त्योहार बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है. ऐसे में पहले से ही हर जगह खूब तैयारीयां हो रही हैं. जन्माष्टमी के खास मौके पर मथुरा को दुल्हन की तरह सजाया गया है.
30 अगस्त को है जन्माष्टमी

उत्तर प्रदेश सरकार के तीन विभाग मिलकर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कृष्णोत्सव के लिए नयी नवेली दुल्हन की तरह मथुरा को सजाने में लगे हुए हैं. पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को सजे धजे चौराहे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों द्वारा कण-कण में श्यामाश्याम की अनुभूति कराएंगे. साथ ही ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के बारे में नई पीढ़ी को जानकारी दी जाएगी. उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, पर्यटन विभाग एंव जिला प्रशासन ने अनूठे कार्यक्रम को इसलिए आयोजित किया है कि वो इसके जरिए वहां आने वाले पर्यटों को ना सिर्फ चकाचौंझ और सजावट से प्रभावित कर पाएं.

 बल्कि जो भी वहां जाए वो ये संदेश लेकर जाए तो ब्रज की संस्कृति बहुत ही ज्यादा समुद्धशाली है. क्योंकि जब गायन, वादन, नृत्य की त्रिवेणी प्रवाहित होती है तो मृग भी अपनी सुध बुध को खो देता है. वहीं ऐसे भी प्राचीन वाद्य यंत्र देखने को मिलता है जो बेहद साधारण है लेकिन अपनी मधुर ध्वनि से परेशाम मानव को कुछ ही क्षण में शांति का अनुभव करवा देता है. शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईयो नगेन्द्र प्रताप ने कहा कि रामलीला मैदान मथुरा में 29 और 30 अगस्त को सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. 

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तो वहीं गोकुल में 31 अगस्त को नन्दोत्सव के अवसर पर विशेष क्रार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. ब्रज के लोक संगीत, लोक नृत्य, रासलीला, जंगम जोगी, नृत्य नाटिका, भजन, कत्थक नृत्य एंव महारस रामलीला मैदान के कार्यक्रमों में प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा. गोकुल और गोवर्धन में भी कई तरह के कार्यक्रम को आयोजित किया जाता है. साथ ही मथुरा के विश्राम घाट, वृन्दावन के केसी घाट और गोकुल के ठकुरानी घाट को द्वापर का स्वरूप दिया गया है.

 

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