गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता के जन्म से जुड़ी इस कथा को पढ़ने से होती है मनोकामना

Anuradha Raj, Last updated: Fri, 10th Sep 2021, 11:57 AM IST
आज यानी 10 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है. ऐसी मान्यता है कि विघ्नाहर्ता का जन्मोत्सव इस दिन मनाया जाता है. 12 बजे के करीब श्रीगणेश का जन्म हुआ था.
गणेश चतुर्थी 2021

शिव और पार्वती जी के पूत्र हैं विघ्नों को हरने वाले गणपति. लेकिनअनादि-अनंद देवता के रूप में गणपति का वर्णन वेदों में किया गया है. नमो गणेभ्यो गणपतिके उच्चारण से ही वेदों में गणपति की वंदना हुई है. हालांकि गणेश जी के जन्म को लेकर पौराणिक मान्यताओं में कई कथाएं हैं. शिव पुराण में गणेश जी के जन्म को लेकर वर्णन किया गया है कि पार्वती जी के उबटन से उनका जन्म हुआ था. तो वहीं अनजाने में शिव जी से युद्ध करते समय उनका शीष धड़ से अलग हो गया था.सबसे ज्यादा प्रचलिच लोक में यही कथा है.

 वहीं स्कंद पुराण में गणेश जन्म की अलग तरह से व्याख्या की गई है, विघ्नाहर्ता के जन्म को राजस्थान में स्थित एक पर्वत से जोड़ा गया है. स्कंद अर्बुद खंड में ऐसी कथा है कि शिव जी से माता पार्वती को पुत्र प्राप्ति का वरदान मिला था. जिसके बाद अर्बुद पर्वत जिसे अब माउंट आबू के नाम से जाना जाता है, वहां गणेश का अवतरण हुआ था. तो वहीं गणेश चालीसा में एक अलग ही कहानी है. इसमें लिखा है कि वरदान के अनुसार माता पार्वती को बहुत ही ज्यादा बुद्धिमान और तेजस्वी बालक प्राप्त हुआ. 

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सारे देव उसे देखने आए. उस दौरान शनि महाराज भी वहां पहुंचे, लेकिन वो नहीं चाहते थे कि उनकी दृष्टि गणेश जी पर पड़े. लेकिन माता पार्वती के आग्रह करने पर शनि देव ने उस बच्चे को देखा, तो आकाश में उस बालक का शीष चला गया. जिसके बाद हाहाकार मचने लगा. जिसके बाद हाथी का सिर लेकर विष्णु के वाहन गरुड़ पहुंचे और बालक को लगा दिया गया. उसके बाद उस बच्चे में शिव जी ने प्राण फूंक दिए. 

 

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