मां दुर्गा समेत 64 देवियों को खुश करने वाला पिठोरी अमावस्या व्रत कल, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Anuradha Raj, Last updated: Sun, 5th Sep 2021, 2:50 PM IST
  • अमावस्य को हिंदू धर्म में बहुत ही ज्यादा महत्व दिया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव समेत 64 देवियों की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्णं होती है.
पिठोरी अमावस्या

अमावस्या को हिंदू धर्म में बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है.भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष को जो अमावस्या पड़ती है उसे पिठोरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. पिठोरी अमावस्या इस साल 6 सितंबर यानी सोमवार को पड़ रहा है. इस अमाव्या को कुशोत्पाटिनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. इस अमाव्स्या के दौरान धार्मिक कार्यों के लिए जिन कुशा का प्रयोग होता है, उसका संग्रह किया जाता है. दरअसल इस अमावस्या के दिन जिस कुश को उखाड़ा जाता है उसका प्रयोग एक महीने तक होता है. ऐसे में जानिए पिठोरी अमावस्या का शुभ मुहूर्त और महत्व.

ये है पिठोरी अमावस्या 2021 का शुभ मुहूर्त

6 सितंबर को अमावस्या तिथि 7 बजकर 38 मिनट पर सुबह से शुरू हो जाएगा और 6 बजकर 21 मिनट तक 7 सितंबर को रहेगा.

ये है पिठोरी अमावस्या का महत्व

इस अमावस्या पर ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा समेत 64 देवियों की आटे से इस दिन मूर्तियां बनाई जाती है. आटे से बनी देवियों की महिलाएं विधि-विधान से पूजा अर्चना करती हैं. इसलिए इसे पिठोरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. इस दिन दान, तप, और स्नान को बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण और पिंडदान स्नान के बाद किया जाता है. इस विधि को करने से पितर प्रसन्न होते हैं, और आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.

ये है पूजा की विधि

जल्दी सुबह उठकर स्नान आदि कर लें. वैसे तो पवित्र नदी या सरोवर में इस दिन स्नान करना बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. लेकिन कोरोना काल में घर पर ही गंगाजल पानी में मिलाकर स्नान कर सकते हैं. घर के मंदिर में स्नान करने के बाद दीप जलाना ना भूलें. सूर्य देव को अर्घ्य दें. अगर संभव हो सके तो इस दिन उपवास भी रखें. पितर संबंधित कार्य इस दिन जरूर करें. पितरों के निमित्त दान और तर्पण करें. अधिक से अधिक इस दिन आप भगवान का ध्यान रखें. भगवान विष्णु की पूजा का इस दिन विशेष महत्व होता है. विधि-विधान से इस दिन भगवान शंकर की पूजा करना ना भूलें.

 

 

 

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