100KW का सोलर सिस्टम को कबाड़ बना हर महीने 10 लाख का बिजली बिल भर रहा है बीआरए विवि

Uttam Kumar, Last updated: Wed, 13th Oct 2021, 12:36 PM IST
    बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय(बीआरए) के प्रशासनिक भवन के ऊपर लगा हुआ सोलर सिस्टम तीन साल से बंद पडा है. जो विवि को प्रति महीने 40 लाख रुपये की बिजली उत्पन्न कर दे सकता है. लेकिन विवि प्रसाशन की लापरवाही के चलते बीआरए विवि खुद हर महीने करीब 10 लाख रुपये बिजली बिल चुका रहा है.
बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय. मुजफ्फरपुर.

मुजफ्फरपुर. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय(बीआरए) के प्रशासनिक भवन (administrative building)के ऊपर लगा हुआ सोलर सिस्टम तीन साल से बंद पडा है. वहीं दूसरी ओर बीआरए विवि प्रशासन ही महीने बिजली बिल के नाम पर करीब 10 लाख रुपये महीना चुका रहा है. बीआरए विवि में 100 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम 2015 में बिहार अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी के सहयोग से लगाया गया था. प्रशासनिक भवन के ऊपर लगा हुआ सोलर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाए तो बीआरए विवि को अपनी जरूरत की बिजली को छोड़कर प्रति महीने करीब 30 लाख रुपये की कमाई हो सकती है. जिसका इस्तेमाल विकास कार्यों में लगाया जा सकता है. 

सोलर ऊर्जा के विशेषज्ञ और बीआरए विवि के भौतिकी विभाग के प्राध्यापक डा. संजय कुमार के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर में रोबस्ट सिस्टम से सोलर पैनल लगाया गया है. जिसके कारण इसमे जल्दी खराबी नहीं हो सकती. सोलर पैनल की आयु 35 वर्ष होती है. इसके बाद इसके ऊर्जा उत्पन्न करने की क्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है. परिसर में 2015 में 100 किलो वाट का सोलर पैनल लगया गया था. लेकिन किसी कारणवश खराब हो गया. तब से इसे ठीक नहीं कराया गया. यदि विवि में लगे सोलर पैनेल में गड़बड़ी आई होगी तो इसका कारण अधिक लोड भी हो सकता है.

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विश्वविद्यालय प्रसाशन को चाहिए कि सबसे पहले एसी के कनेक्शन को इससे हटा दे. साथ ही इनवर्टर की मरम्मत कराके के देखे. इसे मरम्मत करवाके  फिर से शुरू किया जा सकता है. यदि विश्वविद्यालय परिसर में लगे सोलर पैनल से 100 किलोवाट बिजली का उत्पादन नियमित रूप से होता है, तो इससे करीब 40 लाख रुपये की बिजली हर महीने उत्पन्न होगी. जो विश्वविद्यालय की जरूरत पूरा करने में सक्षम है. साथ ही इसे बेचा भी जा सकता. विश्वविद्यालय अपनी जरूरत की बिजली के अलवा बाकी बिजली को टू-वे मीटर के माध्यम से विद्युत विभाग को दे सकता है. जिससे विवि को न तो बिजली बिल देने की आवश्यकता पड़ेगी साथ ही इसके बदले विवि को लाखों रुपये की आमदनी हो सकता  है. 

 

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