बिहार चुनाव: जानिए कैसे तिरहुत और मिथिलांचल बनाएंगे सत्ता के गलियारों का रास्ता

Smart News Team, Last updated: 18/09/2020 11:48 AM IST
  • बिहार विधानसभा चुनाव 2020 उत्तर बिहार का भूमिका अहम रहने वाली है. एनडीए के घटक दलों बीजेपी और जेडीयू से लेकर महागठबंधन में आरजेडी के बीच इस बार मुकाबला पहले से भी दिलचस्प होने वाला है.
तिरहुत और मिथिलांचल की सीटों सत्ता के गलियारों तक ले जाने के लिए महत्वपूर्ण हैं.

मुुजफ्फरपुर. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में उत्तर बिहार में इस बार रोमांचित और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा. उत्तर बिहार की सीटों पर राजद के अगुवाई में महागठबंधन के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती है तो वहीं जेडीयू बीजेपी के सामने 2010 के बिहार चुनाव परिणाम को दोहराने का दबाव है.

इस साल के विधानसभा चुनाव में तिरहुत प्रमंडल के मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, वैशाली, शिवहर और दरभंगा प्रमंडल के दरभंगा, समस्तीपुर और मधुबनी की कुल 79 सीटों पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा.

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गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव 2010 में एनडीए में बीजेपी और जेडीयू एक साथ थे. तब यहां मुकाबले में उन्हें बंपर बढ़त मिली थी. एनडीए ने इस क्षेत्र की कुल 79 सीटों में से 68 सीटों पर एकतरफा कब्जा जमाते हुए तिरहुत-मिथिलांचल को अपना गढ़ बना लिया. इस चुनाव में आरजेडी के 48 प्रत्याशी हारे और उसे सिर्फ 8 सीटों से संतोष करना पड़ा. इसके बाद विधानसभा चुनाव 2015 में एनडीए से अलग होकर जेडीयू महागठबंधन में शामिल हो गई. इस बार एनडीए को पछाड़कर महागठबंधन में इन 79 सीटों में से 52 पर कब्जा जमा लिया.

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इस तरह आरजेडी को जेडीयू का साथ मिलते ही 28 बढ़ी सीटों के साथ बड़ी वापसी की और 2015 में एनडीए गढ़ रहे तिरहुत-मिथिलांचल पर महागठबंधन का कब्जा हो गया. इसमें जेडीयू के 19 उम्मीदवार तो जीते थे लेकिन भाजपा के साथ सफलता वाला ग्राफ धड़ाम हो गया. वहीं कांग्रेस को महागठबंधन में शामिल होकर 5 सीट पर खाता खोल पाई थी.

लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन का गणित 2015 के मुकाबले बदला हुआ है. जेडीयू एक बार फिर एनडीए के  साथ है. अब तो मांझी के ‘हम’ का भी वापसी हो चुकी है. दूसरी तरफ अब रालोसपा आरजेडी के साथ है. ऐसे में, देखना दिलचस्प होगा कि महागठबंधन अपना गढ़ बचा पाता है या एनडीए 2010 वाली सफलता दोहराती है. 

 

 

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