मुजफ्फरपुर: डीएम कोर्ट तक सिमट कर रह गया बिहार में शराबबंदी का संकल्प

Smart News Team, Last updated: 12/12/2020 09:20 AM IST
  • बिहार सरकार ने 2016 में संम्पूर्ण राज्य में शराबबंदी का संकल्प लिया था. बिहार पुलिस ने प्रदेश में अब तक 30664 मामलो में का खुलासा किया है. जिसमें से कोर्ट ने 8314 मामले में फैसला सुनाया है. 
बिहार में कोर्ट तक सीमित रह गया शराबबंदी का संकल्प

मुजफ्फरपुर: बिहार में शराबबंदी का संकल्प प्रदेश के डीएम कोर्ट तक ही सिमट कर रह गया है. प्रदेश में एक अप्रैल 2016 को शराबबंदी का सकल्प लिया गया था. इस शराबबंदी के दौरान जब्त किये गये वाहन और संपति के मामलो पर कोर्ट कोई फैसला नहीं कर पा रही है. निषेद उत्पादन एव निबंधन विभाग के अपर सचिव आमिर सुबाहनी ने प्रदेश के सभी डीएम को निर्देश दिया है कि डीएम कोर्ट पुलिस के वाहन व संपत्ति अधिकरण के प्रस्ताव को अपने कोर्ट में तीन माह के अंदर फैसला करें.

प्रदेश में शराबंदी के फैसले के संकल्प लेने के बाद पुलिस ने वाहन व संपत्ति के 30664 मामलों को डीएम कोर्ट में भेजा था, जिसमें से अब तक केवल 8314 प्रस्तावों पर कोर्ट अपना फैसला दे पाया है. इन 8314 मामलों में 7822 संपत्ति व 792 वाहनो के मामले थे. अपर सचिव ने हाईकोर्ट के मो. अली अफसर बनाम बिहार राज्य सरकार राज्य मामले पर फैसला लेने को कहा है. अब तक हाईकोर्ट ने भी शराबबंदी के मामलों में 558 वाहनो को मुक्त कर दिया है.

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बता दें कि जब पुलिस किसी वाहन या घर से शराब बरामद करती है, निधारित कानून के तहत पुलिस वाहन और संपत्ति को जब्त कर लेती है. जिसके बाद वाहन और संपत्ति की नीलामी की जाती है. नीलामी से प्राप्त पैसे को सरकारी खजाने में जमा कर दिया जाता है. निषेध विभाग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में शराबबंदी के मामलें पुलिस ने कुल 7505 वाहनो के पकड़ है. इसमें से 6625 वाहनो को रिपोर्ट कोर्ट को भेज दी है, जिसमें डीएम ने 3693 मामलों में अपना फैसला सुना दिया है.

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