मुजफ्फरपुर के राजकुमार ने तोड़ी दिव्यांगता की बाधा, खोला 'दिव्यांग रोजगार केंद्र

Smart News Team, Last updated: 07/04/2021 11:09 AM IST
  • मुजफ्फरपुर के एक हाथ और पांव से दिव्यांग राजकुमार ने बेला औद्योगिक क्षेत्र फेज-दो में 'दिव्यांग रोजगार केंद्र खोला है, जिसमें सिर्फ दिव्यांगों को रोजगार दिया जाता है. जहां काम करने वाले लोग प्रतिमाह 50 हजार से एक लाख तक की आमदनी कर रहे हैं.
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मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर के रहने वाले दिव्यांग राजकुमार ने अपने जैसे कई लोगो के लिए कुछ ऐसा किए जिससे उनके हौसलों को उड़ान मिल सके. एक हाथ और पांव से दिव्यांग राजकुमार ने मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र फेज-दो में 'दिव्यांग रोजगार केंद्र खोला है, जिसमें सिर्फ दिव्यांगों को रोजगार दिया जाता है. वहां काम करने वाले लोग प्रतिमाह 50 हजार से एक लाख तक की आमदनी कर रहे हैं. इस केंद्र की शुरुआत कर उन्होंने सबको बता दिया है कि दिव्यांग भी किसी से कम नहीं होते हैं.

लेनिन चौक सराय सैयद अली लेन के रहने वाले राजकुमार ने जून, 2019 में खादी ग्रामोद्योग केंद्र से मसाला, सत्तू, बेसन आदि की पिसाई व पैकिंग का प्रशिक्षण लिया था. उनकी दिव्यांगता की वजह से उन्हें कहीं काम नहीं मिल रहा था. वर्ष 2020 के मार्च में उन्होंने बेला औद्योगिक इलाके में एक यूनिट लगाने की पहल की जहां पर लॉकडाउन से पहले ही उन्होंने उत्पादन शुरू कर दिया था. हालांकि, लॉकडाउन के उस दौर में एक नई यूनिट संभालना बहुत चुनौती भरा था. बाद के दिनों में उनका रोजगार चौपट हो गया, लेकिन तब भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने अपने साथ सात दिव्यांगों को काम दिया है. ये लोग पिसाई के अलावा पैकिंग व काउंटिंग का काम करते हैं. उनके साथ काम करने वाले श्रमिकों को तीन हजार तक पारिश्रमिक दिया जाता है. इसके अलावा उनके रहने व खाने-पीने की व्यवस्था भी है.

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राजकुमार गुप्ता की फैक्ट्री में काम कर रहे मालीघाट के रहने वाले विनोद साहनी पांव से दिव्यांग हैं. उन्होंने बताया कि वे यहां पर पैकिंग का काम करते हैं. यहां काम करने से पहले वह नाश्ते-पानी का होटल चलाते थे, लेकिन वह बंद हो गया. जिसके बाद उनकी मुलाकात जिला खादी उद्योग केंद्र में राजकुमार से हुई और उनके यहां काम मिल गया.

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इस यूनिट में हर महीने 30 से 35 क्विंटल सत्तू व बेसन, 10 से 15 क्विंटल विभिन्न तरह के मसाले, हल्दी व मिर्च पाउडर तैयार किया जाता है. चने की खरीदारी स्थानीय थोक मंडी से की जाती है वहीं बाकी चीजे जैसे हल्दी, धनिया, जीरा व मिर्च आदि समस्तीपुर से आता है. उत्पाद का भाव स्थानीय मंडी के अनुसार तय होता है. सप्लाई मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में की जाती है.

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राजकुमार ने बताया कि उन्होंने 100 दिव्यांगों को रोजगार देने की योजना बनाई है. वे कागज का कटोरा, मिठाई का डिब्बा, मोमबत्ती, झाडू, रूई बत्ती आदि भी बनाना चाहते हैं. इसके लिए जिला खादी ग्रामोद्योग संघ से संपर्क भी किया गया है. प्रशिक्षण मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा. उनके पास सरकार की ओर से आवंटित साढ़े तीन कट्ठा जमीन है.

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राजकुमार की इस यूनिट के बारे में जिला उद्योग के महाप्रबंधक परिमल कुमार सिन्हा ने कहा कि देखकर अच्छा लगता है कि दिव्यांगजन रोजगार के जरिये समाज की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं. इस तरह के जो भी लोग हैं, उन्हें सहयोग किया जा रहा है.

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